मैहर की खदानों में सुरक्षा मानकों के पालन पर उठ रहे सवाल, श्रमिकों के स्वास्थ्य प्रबंधन पर भी नजर जरूरी
मैहर, 05 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश का मैहर जिला देश के प्रमुख सीमेंट उत्पादन केंद्रों में शामिल है। यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध चूना पत्थर के कारण कई बड़ी सीमेंट कंपनियां और दर्जनों लाइमस्टोन खदानें संचालित हो रही हैं। खनिज संपदा से समृद्ध यह क्षेत्र प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
देशभर में संचालित खदानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जिम्मेदारी भारत सरकार के खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की होती है। यह संस्था खदानों में कार्यरत श्रमिकों के जीवन, स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित नियमों और प्रावधानों के पालन की निगरानी करती है। सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी न केवल श्रमिकों बल्कि मशीन ऑपरेटरों और आसपास के क्षेत्रों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है।
खनन नियमों के अनुसार खदानों में बेंच वैज्ञानिक तरीके से विकसित की जानी चाहिए तथा उनकी ऊंचाई और चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। इसी प्रकार ढलानों का कोण भी सुरक्षित सीमा में रखा जाना चाहिए, ताकि भूस्खलन या चट्टान धंसने जैसी दुर्घटनाओं की आशंका कम रहे। भारी वाहनों की आवाजाही के लिए हॉल रोड पर्याप्त चौड़ी, समतल और सुरक्षित होना भी अनिवार्य माना गया है।
इसके अलावा विस्फोटक कार्य निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत ही किया जाना चाहिए। प्रत्येक श्रमिक को हेलमेट, सुरक्षा जूते, रिफ्लेक्टिव जैकेट, दस्ताने, सुरक्षा चश्मा सहित अन्य आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना भी नियमों का हिस्सा है। खदानों में प्रशिक्षित प्रबंधक, पर्यवेक्षक और आपातकालीन बचाव व्यवस्था की उपलब्धता भी आवश्यक मानी जाती है।
सुरक्षा के साथ-साथ श्रमिकों का स्वास्थ्य संरक्षण भी खनन उद्योग का महत्वपूर्ण पक्ष है। धूल, अत्यधिक शोर, कंपन और भारी मशीनों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना चाहिए। नियमों के अनुसार आवश्यकता के अनुरूप चिकित्सक, प्राथमिक उपचार केंद्र, एम्बुलेंस तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही धूलजनित फेफड़ों की बीमारियों, श्रवण क्षमता पर प्रभाव तथा अन्य व्यावसायिक रोगों की नियमित जांच भी आवश्यक मानी जाती है।
ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आता है कि मैहर क्षेत्र की सभी लाइमस्टोन खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी इन मानकों का कितना प्रभावी पालन हो रहा है। क्या प्रत्येक श्रमिक का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है? क्या सभी खदान परिसरों में चिकित्सकीय सुविधाएं और प्राथमिक उपचार केंद्र उपलब्ध हैं? क्या आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है? यदि कहीं बेंच निर्धारित मानकों से अधिक ऊंची हैं, ढलान असुरक्षित हैं, सुरक्षा उपकरणों की कमी है अथवा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, तो ऐसे मामलों पर संबंधित एजेंसियों द्वारा गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनिज संसाधनों का दोहन आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह विकास श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से समझौता कर हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसे में अपेक्षा की जाती है कि संबंधित विभाग, खान सुरक्षा महानिदेशालय और खनन कंपनियां सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सभी प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही समय-समय पर निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रमिकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

