मैहर में जंगली हाथी की गतिविधियों पर वन विभाग और प्रशासन की कड़ी नजर
मैहर, 09 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन वन परिक्षेत्र में एक जंगली नर हाथी के विचरण को देखते हुए वन विभाग और जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। हाथी की गतिविधियों पर वन विभाग की निगरानी टीम लगातार नजर रख रही है। रात्रि के समय हाथी की सक्रियता अधिक होने के कारण अमरपाटन, मैहर और मुकुंदपुर वन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरती जा रही है।
वन मंडलाधिकारी विद्या भूषण मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में जंगली नर हाथी अमरपाटन वन परिक्षेत्र के गोरसी बीट और आसपास के ग्राम क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। इससे पहले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया प्रशासन द्वारा हाथी की गतिविधियों का जीपीएस कॉलर के माध्यम से वैज्ञानिक अनुश्रवण एवं प्रबंधन किया जा रहा था। वर्तमान में मैहर वन मंडल द्वारा हाथी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि बीते दिन बाणसागर क्षेत्र में हाथी से जनहानि और पशुहानि का प्रकरण सामने आया था। वन विभाग द्वारा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शासन के प्रावधानों के तहत आठ लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि स्वीकृत की गई है।
वन विभाग के अनुश्रवण दल हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर हाथी के विचरण वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
हाथी से दूरी बनाए रखने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों और आम नागरिकों से हाथी के नजदीक नहीं जाने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि हाथी को घेरने, खदेड़ने या किसी भी तरह से परेशान करने का प्रयास न करें। जंगल में बिना अनुमति प्रवेश करने से बचें और हाथी की तस्वीर या सेल्फी लेने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें।
हाथी को पत्थर मारने, शोर करने या किसी अन्य तरीके से उत्तेजित नहीं करने की भी अपील की गई है। हाथी दिखाई देने पर कम से कम 200 मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
वन विभाग ने कहा कि हाथी के विचरण वाले क्षेत्र के जंगल किनारे स्थित कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीण यथासंभव ग्राम पंचायत भवन या अन्य पक्के और सुरक्षित सामुदायिक भवनों में आश्रय लें। हाथी के खेतों में पहुंचने पर उसे भगाने के लिए उसके पास जाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
विभाग के अनुसार वन्यप्राणी से फसल को होने वाली क्षति की स्थिति में राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि राजस्व विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी।
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि हाथी के संबंध में कोई भी सूचना मिलने पर तत्काल निकटतम वन अधिकारी अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। साथ ही विभाग द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

