रीवा के सिरमौर में न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में लामबंद हुए अधिवक्ता, परियोजना निरस्त करने की मांग
रीवा, 04 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के रोझौही-क्यौटी में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध अब अधिवक्ता समुदाय तक पहुंच गया है। बुधवार शाम सिरमौर तहसील के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें परियोजना को निरस्त करने अथवा किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
अधिवक्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने से जनसुरक्षा, पर्यावरण और जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने चेरनोबिल, फुकुशिमा और थ्री माइल आइलैंड में हुई परमाणु दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए घनी आबादी के बीच इस तरह की परियोजना स्थापित करने पर सवाल उठाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि परमाणु रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में पहले से जल संकट का सामना कर रहे विंध्य क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अधिवक्ताओं ने क्यौटी जलप्रपात और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र की जैव विविधता पर भी चिंता जताई।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना के माध्यम से क्षेत्र सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पहले ही पहचान बना चुका है। ऐसे में परमाणु संयंत्र के बजाय सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ज्ञापन में परमाणु संयंत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

