अनूपपुर: महाराज का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा, आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा- हिमाद्री मुनि महाराज
अनूपपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। श्री उदासीन संत परंपरा ने सदियों से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना एवं मानव सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। भगवान श्री चंद्रदेव जी महाराज के आदर्श आज भी समाज को सेवा, त्याग, समरसता, साधना एवं लोककल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। आचार्य श्री श्री चंद्रदेव जी महाराज का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा , आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा। उनकी शिक्षाएं व्यक्ति को भेदभाव , आडंबर और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर सत्य , संयम , सदाचार और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं । वर्तमान समय में भी उनके विचार समाज को एकता , प्रेम और सेवा का संदेश प्रदान कर रहे हैं।
यह बातें मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में श्री कल्याण सेवा आश्रम में रविवार को उदासीन संप्रदाय के आराध्य, महान तपस्वी एवं लोककल्याणकारी संत आचार्य श्री श्री चंद्रदेव जी महाराज का 532वां प्राकट्योत्सव पर कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक के प्रबंध न्यासी पूज्य स्वामी हिमाद्री मुनि जी महाराज ने कहीं।
उदासीन संप्रदाय के आराध्य, महान तपस्वी एवं लोककल्याणकारी संत आचार्य श्री श्री चंद्रदेव जी महाराज का 532वां प्राकट्योत्सव पर कल्याण सेवा आश्रम श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन, वैदिक अनुष्ठान, संत-सत्संग एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जहां दूर-दूर से पहुंचे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं भक्तजनों ने सहभागिता की।
आश्रम परिसर में प्रातःकाल से ही धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना एवं पूजन-अर्चन के मध्य श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री श्री चंद्रदेव जी महाराज का स्मरण कर उनके चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। पूरे परिसर में भक्ति गीतों , गुरु महिमा एवं आध्यात्मिक चर्चा की मधुर ध्वनि गूंजती रही, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महान संत के रूप में स्मरण
धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान श्री चंद्रदेव जी महाराज का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी, संवत 1551 में हुआ था । उनका बाल्य नाम चंद्रदेव था। उदासीन परंपरा में उन्हें श्री गुरु नानकदेव जी महाराज के सुपुत्र तथा उदासीन संप्रदाय के प्रमुख प्रवर्तक संतों में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और लोकसेवा के समन्वित मार्ग को अपनाकर समाज में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार किया।
उनकी शिक्षाओं में मानव मात्र की एकता , सामाजिक समरसता , वैदिक संस्कृति का संरक्षण तथा लोककल्याण की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है । उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को सरल एवं सहज रूप में जनसाधारण तक पहुंचाने का कार्य किया तथा समाज को सत्य , सेवा और साधना का मार्ग दिखाया । उदासीन संत परंपरा में उन्हें त्याग , तपस्या , वैराग्य और करुणा की प्रतिमूर्ति के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है ।
संत-महात्माओं को किया गया स्मरण
प्राकट्योत्सव के अवसर पर आयोजित संत-सम्मेलन एवं सत्संग में संत-महात्माओं ने आचार्य श्री श्री चंद्रदेव जी महाराज के जीवन, उनके आध्यात्मिक योगदान तथा मानवता के लिए दिए गए संदेशों का स्मरण करते हुए भगवान के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर स्वामी धर्मानंद जी महाराज, स्वामी शांतानंद जी महाराज, स्वामी नर्मदानंद जी महाराज, स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज, स्वामी रामानंद जी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे। आश्रम के पुजारी पंडित संदीप ज्योतिषी, पंडित सुनील दुबे, पंडित मुकेश पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भक्त एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए समाज में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार का संकल्प लिया।
विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं आगंतुक भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में अनुशासन , श्रद्धा और सेवा भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

