प्रधानमंत्री मोदी के सेवा प्रकल्पों के बीच छाया महाराज का जलवा, समर्थकों ने अनोखे अंदाज में मनाया मार्गदर्शन वर्ष

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प्रधानमंत्री मोदी के सेवा प्रकल्पों के बीच छाया महाराज का जलवा, समर्थकों ने अनोखे अंदाज में मनाया मार्गदर्शन वर्ष


अशोकनगर, 24 सितंबर(हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में इन दिनों राजनीति का एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला नजारा चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां पूरा देश और स्थानीय संगठन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) के उपलक्ष्य में विभिन्न सेवा प्रकल्पों और जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने अपने ही अंदाज में सियासी गलियारों का ध्यान खींच लिया है।

क्या है पूरा मामला?क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अक्सर अपने भाषणों और मंचों से युवाओं के लिए रोजगार और विकास कार्यों का जिक्र करते हैं, जिनमें विशेष तौर पर कॉल सेंटर खोले जाने की बात प्रमुखता से कही जाती है। इसी वादे और विकास कार्य को जमीन पर उतारने के सिलसिले के बीच, को शहर में स्थित कॉल सेंटर पर सिंधिया समर्थकों द्वारा एक बड़ा और आकर्षक पोस्टर लगाया गया। इस पोस्टर के केंद्र में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था— महाराज के मार्गदर्शन का एक वर्ष।

सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्मजैसे ही इस पोस्टर की तस्वीरें और यह वाकया गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं।एक तरफ सेवा पखवाड़ा: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन इन दिनों प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के बहाने जनता के बीच सेवा कार्यों, स्वास्थ्य शिविरों और स्वच्छता अभियानों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा है।

दूसरी तरफ व्यक्तिगत ‘मार्गदर्शन वर्ष’ ऐसे सेवामय माहौल के बीच, सांसद सिंधिया के समर्थकों द्वारा उनके मार्गदर्शन का एक वर्ष पूरा होने की वाहवाही लूटना और बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर लगाना लोगों के बीच कौतूहल का विषय बन गया है।

इस वाकये ने आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों दोनों को अचरज में डाल दिया है कि एक ही पार्टी के भीतर चल रहे इन दो अलग-अलग आयोजनों का निहितार्थ क्या है। जहां एक ओर मोदी के नाम पर सेवा का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर महाराज के नाम का यह शक्ति प्रदर्शन अशोकनगर की राजनीति में नया रंग भर रहा है।

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय राजनीति में नेताओं की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके समर्थकों का उत्साह कई बार आधिकारिक संगठनात्मक कार्यक्रमों से अलग एक समानांतर राजनीतिक संस्कृति को जन्म दे देता है। इस पूरे घटनाक्रम को आप स्थानीय राजनीति के किस रूप में देखते हैं—क्या यह सांगठनिक प्राथमिकताओं से इतर व्यक्तिगत प्रभाव दिखाने की होड़ है?

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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