मध्य प्रदेश में पोषण आहार पर सवाल, कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
भोपाल, 19 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि आंगनवाड़ियों में निर्धारित 300 दिनों के मुकाबले जुलाई तक करीब 170 दिन ही नियमित पोषण आहार उपलब्ध कराया गया।
जीतू पटवारी ने बुधवार काे बयान जारी कर आराेप लगाया है कि प्रदेश के सात पोषण आहार प्लांट बंद हैं और नई व्यवस्था के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पोषण आहार की आपूर्ति जल्द बहाल कर 300 दिनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कुपोषण के आंकड़ों को लेकर चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने NFHS-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अंडरवेट की दर 39.7 प्रतिशत, वेस्टिंग 23.8 प्रतिशत और स्टंटिंग 31.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर ये आंकड़े क्रमश: 31.8, 19 और 29.3 प्रतिशत हैं।
उन्होंने कहा कि NFHS-5 और NFHS-6 के बीच देश में अंडरवेट और वेस्टिंग के आंकड़ों में सुधार हुआ, जबकि मध्य प्रदेश में दोनों संकेतकों में वृद्धि दर्ज की गई। कांग्रेस के मुताबिक प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की दर 33 प्रतिशत से बढ़कर 39.7 प्रतिशत और वेस्टिंग 18.9 प्रतिशत से बढ़कर 23.8 प्रतिशत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अंडरवेट बच्चों की दर करीब 42 प्रतिशत बताई गई है।
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों का हवाला
पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि वर्ष 2025 में विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 1.36 लाख बच्चे कुपोषित पाए गए थे। इनमें 29,830 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित और करीब 1.06 लाख बच्चे मध्यम रूप से कुपोषित बताए गए थे। उन्होंने बताया कि सरकार के अनुसार प्रदेश में गंभीर एवं मध्यम कुपोषण की दर 7.79 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.40 प्रतिशत बताया गया था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पोषण के लिए निर्धारित राशि पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार आंगनवाड़ियों में कुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन 8 रुपये और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए 12 रुपये का प्रावधान बताया गया है। उन्होंने इसकी तुलना गौशालाओं में एक गाय के आहार के लिए निर्धारित 40 रुपये प्रतिदिन की राशि से करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
पटवारी ने कहा कि इतनी कम राशि में बच्चों को संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में सरकार की ओर से राशि को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग किए जाने की बात सामने आई थी।
सरकार से सात सवाल
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव और महिला एवं बाल विकास विभाग से पूछा कि निर्धारित 300 दिनों के बजाय करीब 170 दिन ही पोषण आहार क्यों उपलब्ध कराया गया, सातों पोषण आहार प्लांट बंद क्यों हैं और नई व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हुई। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि बच्चों के लिए शेष करीब 130 दिनों के पोषण आहार की भरपाई कैसे होगी और कुपोषण की बढ़ती दर के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने पोषण आहार की राशि बढ़ाने तथा केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगने के बजाय राज्य स्तर पर पर्याप्त प्रावधान किए जाने की मांग की।
पटवारी ने कहा कि “बच्चों के पोषण को केवल योजनाओं और प्रचार तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सरकार को आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त कर बच्चों को नियमित और पर्याप्त पोषण आहार उपलब्ध कराना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े मुद्दे पर सरकार को विधानसभा से लेकर सड़क तक जवाबदेह बनाएगी और सभी पोषण आहार केंद्रों को जल्द शुरू करने की मांग जारी रखेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

