रीवाः ह्मदय रोग विभाग में पेसमेकर इम्प्लांट कर बचायी गई मरीजों की जान

रीवा, 21 नवंबर (हि.स.)। विश्व की सर्वोच्च तकनीक, (एलबीबी पेसिंग) से पेसमेकर इंप्लांट करके सुपरस्पेशलिटी रीवा ने फिर इतिहास रचा। सुपरस्पेशलिटी रीवा के कार्डियोलॉजी विभाग ने हृदय के अत्यंत जटिल प्रोसीजर करके कई इतिहास रचे हैं और अब तक छह हजार से अधिक लोगों की जान बचाई है। इसी कड़ी में डॉ. एस के त्रिपाठी, सह प्राध्यापक कार्डियोलॉजी ने विश्व की नवीनतम तकनीक एलबीबी पेसिंग कर एक ही सप्ताह में दो मरीजों की जान बचाई।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक अक्षय श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि सामान्यतः जो पेसमेकर मरीजों को लगाए जाते हैं उनमें पेसमेकर लीड हृदय के एक चेंबर में इंप्लांट की जाती है, जिससे भविष्य में हृदय की पंपिंग कम होने का खतरा बना रहता है। एलबीबी पेसिंग तकनीक में पेसमेकर की लीड हृदय के कंडक्शन सिस्टम में फिक्स की जाती है, जिससे हृदय बिलकुल सामान्य तरीके से धड़कता है। यही कारण है कि इसमें हृदय की पंपिंग कम होने का खतरा नही होता और जिन मरीजों की पंपिंग पहले से कम है वो समय के साथ इस तकनीक से इंप्रूव भी होती है।

तकनीक को सफल बनाने में कैथ लब टेक्नीशियन जय नारायण मिश्र, सत्यम शर्मा, मनीष सुमन और नर्सिंग स्टाफ इंद्रभान मांझी एवं ओ.टी. नर्सिंग इंचार्ज पुष्पेंद्र की अहम भूमिका रही।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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