देवास में उम्मीद की कहानी: जानलेवा बीमारी को हराकर फिर जंगल लौटा तेंदुआ

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देवास में उम्मीद की कहानी: जानलेवा बीमारी को हराकर फिर जंगल लौटा तेंदुआ


देवास, 24 मार्च (हि.स.)।

वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर चिंताओं के बीच मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक राहतभरी खबर सामने आई है। यहां एक तेंदुए ने खतरनाक बीमारी को मात देकर न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि अब वह फिर से प्राकृतिक वातावरण में लौट चुका है। यह घटना वन विभाग और पशु चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों का सफल उदाहरण मानी जा रही है।

कुछ समय पहले यह तेंदुआ इंसानी बस्तियों के आसपास असामान्य व्यवहार करता हुआ देखा गया था। वह लोगों के बेहद करीब पहुंच रहा था और उसके व्यवहार में सामान्य जंगली प्रवृत्ति का अभाव दिख रहा था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।

जांच में सामने आया कि तेंदुआ कैनाइन डिस्टेंपर नामक गंभीर बीमारी से संक्रमित था। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक माहेश्वरी के अनुसार, यह बीमारी जानवरों के नर्वस सिस्टम पर असर डालती है, जिससे उनकी शिकार करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। संक्रमित जानवरों में असामान्य गतिविधियां, एक ही स्थान पर घूमते रहना और इंसानों का भय समाप्त होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर तेंदुए को सुरक्षित पकड़ा और विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया। लगातार इलाज और देखभाल के चलते उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।

खिवनी अभ्यारण के अधीक्षक विकास मोहरे ने बताया कि कैनाइन डिस्टेंपर जैसी बीमारी में जंगली जानवरों का जीवित बचना बेहद दुर्लभ होता है। ऐसे में इस तेंदुए का स्वस्थ होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

स्वस्थ होने के बाद तेंदुए को देवास जिले के खिवनी अभ्यारण में छोड़ा गया है। घने जंगल, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित हो रहा है।

वन विभाग के अनुसार, हाल के वर्षों में इस अभ्यारण में वन्यजीवों की सक्रियता बढ़ी है, जो यहां के पारिस्थितिक संतुलन की मजबूती को दर्शाता है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि समय पर किए गए प्रयास और उचित संरक्षण से वन्यजीवों को नई जिंदगी दी जा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्‍द्र राठी

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