टीवी सीरियल लक्ष्मी निवास के दृश्यों पर आपत्ति, अधिवक्ता ने भेजा नोटिस
जबलपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। टीवी सीरियल 'लक्ष्मी निवास' में धार्मिक स्थल 64 योगिनी मंदिर और ग्वारीघाट में कथित रूप से छेड़छाड़ के दृश्य फिल्माए जाने को लेकर नया विवाद सामने आया है। जबलपुर के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने सीरियल की निर्माता रश्मि शर्मा, निर्देशक पवन कुमार मारुत और ज़ी टीवी प्रबंधन को कानूनी नोटिस जारी कर आपत्तिजनक दृश्यों को तत्काल हटाने की मांग की है।
अधिवक्ता तिवारी ने बुधवार को नोटिस में कहा है कि 64 योगिनी मंदिर सनातन परंपरा में शक्ति स्वरूपा देवियों का पवित्र स्थान है। ऐसे स्थल को छेड़छाड़ जैसे कृत्यों के लिए दिखाना धार्मिक भावनाओं का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल पर, विशेषकर मंदिर में, कोई भी श्रद्धालु इस तरह की हरकत की कल्पना भी नहीं कर सकता। यह दृश्य अत्यंत आपत्तिजनक और अस्वीकार्य हैं। उन्होंने ग्वारीघाट में दिखाए गए इसी तरह के दृश्यों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि माँ नर्मदा के तट पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, ऐसे पवित्र स्थान पर इस तरह के दृश्य दिखाना श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
अधिवक्ता तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे सीरियल के कुछ वीडियो क्लिप्स देखे, जिनमें 64 योगिनी मंदिर, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर और ग्वारीघाट जैसे पवित्र स्थलों पर शूट किए गए दृश्य शामिल हैं। इन दृश्यों में सीरियल की मुख्य महिला पात्र के साथ मंदिर परिसर में ही दो युवकों को छेड़छाड़ करते और अभद्र टिप्पणी करते दिखाया गया है।उन्होंने यह भी बताया कि विवादित दृश्यों की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित उपलब्ध है, जिसे वे आवश्यकता पड़ने पर अदालत में प्रस्तुत करेंगे।
नोटिस में यह आरोप है कि इन दृश्यों को जबलपुर की छवि खराब करने की नीयत से जानबूझकर पवित्र स्थलों पर फिल्माया गया। उन्होंने कहा कि जबलपुर संस्कार धानी के नाम से जाना जाता है। ऐसे दृश्य शहर की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाते हैं। नोटिस में निर्माता, निर्देशक और चैनल को 7 के भीतर सभी आपत्तिजनक दृश्यों को टीवी सीरियल और डिजिटल/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया गया है। अधिवक्ता तिवारी ने कानूनी कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

