हंडिया क्षेत्र के स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों की कमी, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

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हंडिया क्षेत्र के स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों की कमी, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल


हंडिया क्षेत्र के स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों की कमी, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल


हंडिया क्षेत्र के स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों की कमी, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल


हरदा, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिले के हंडिया क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। माध्यमिक शाला हीरापुर, एकीकृत हायर सेकंडरी स्कूल मगरूल और प्राथमिक शाला बागरूल सहित अन्य विद्यालयों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी वैधता को लेकर लोगों ने चिंता जताई गई है। आरोप है कि कुछ स्कूलों में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कहीं उपकरणों की वैधता समाप्त होने की स्थिति है। इसके अलावा, एक स्कूल की अलमारी में राष्ट्रीय ध्वज गलत तरीके से रखा होने की बात भी सामने आई है।

हंडिया क्षेत्र के वनांचल इलाकों में स्थित स्कूलों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने पहुंचते हैं। ऐसे में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम होना आवश्यक है। यदि विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं हैं या रखरखाव के अभाव में इस्तेमाल करने योग्य नहीं हैं, तो हादसे के समय मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर आग पर काबू नहीं पाए जाने पर छोटी घटना भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। इसलिए स्कूलों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है।

अग्निशमन यंत्र लगा होना ही पर्याप्त नहीं है। उसकी वैधता, तकनीकी स्थिति और उपयोग करने की प्रक्रिया की नियमित जांच भी आवश्यक है। यदि किसी उपकरण की वैधता समाप्त हो गई है, तो आपात स्थिति में उसके प्रभावी ढंग से काम करने को लेकर आशंका बनी रहती है। ऐसे में समय पर यंत्रों को रिफिल कराना या जरूरत के अनुसार बदलना जरूरी है।

इसके साथ ही शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को भी आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचने और आपात परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी देना आवश्यक है।

विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और स्कूल प्रबंधन की है। ऐसे में सभी स्कूलों का निरीक्षण कर अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, वैधता और कार्यशीलता की जांच की जानी चाहिए। जहां उपकरण नहीं हैं, वहां उनकी व्यवस्था करने और अनुपयोगी यंत्रों को दुरुस्त कराने की जरूरत है।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। समय रहते कमियों को दूर करने से संभावित दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सकता है और विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

इस मामले में हरदा के बीआरसी नारायण नायरे ने कहा, “आपके द्वारा जानकारी संज्ञान में लाई गई है। इस संदर्भ में मैं स्वयं जाकर जानकारी लूंगा।”

हिन्दुस्थान समाचार / Pramod Somani

Livevns.news Desk
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