कुणाल चौधरी ने खाद, उपज के दाम और भुगतान को लेकर उठाए सवाल, कहा- कृषि महोत्सव के बजाय समस्याओं पर ध्यान दे सरकार
भोपाल, 17 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल चौधरी ने प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाए जाने की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसान कल्याण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान खाद की उपलब्धता, उपज के उचित मूल्य और भुगतान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार को उत्सवों और प्रचार के बजाय किसानों की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता देनी चाहिए।
कुणाल चौधरी ने साेमवार काे कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में आयाेजित पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार के किसान कल्याण संबंधी दावों और किसानों की जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने 14 जून 2026 को जारी उस सरकारी आदेश का हवाला दिया, जिसमें आईएफएमएस पोर्टल और डीलरों के वास्तविक स्टॉक के मिलान की प्रक्रिया के चलते प्रदेश में “आगामी आदेश तक” उर्वरक बिक्री रोकने का उल्लेख था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्टॉक और सरकारी रिकॉर्ड के मिलान की प्रक्रिया आवश्यक थी, तो इसका असर किसानों पर क्यों पड़े?
कांग्रेस नेता ने कहा कि मानसून में देरी के दौरान धान उत्पादक किसानों को बोवनी के लिए खाद की जरूरत थी। ऐसे समय में उर्वरक की बिक्री पर रोक से किसानों को परेशानी हुई। उन्होंने सरकार से खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वितरण प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की।
गेहूं और सोयाबीन किसानों की स्थिति पर भी सवाल
कुणाल चौधरी ने गेहूं और सोयाबीन किसानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि गेहूं बेचने के दौरान किसानों को भीषण गर्मी में मंडियों में लंबा इंतजार करना पड़ा। उनका दावा है कि कई सोयाबीन उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार को मंडियों में व्यवस्थाएं बेहतर करने के साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
मूंग खरीदी को लेकर उन्होंने बुदनी और होशंगाबाद क्षेत्र के किसानों का मुद्दा भी उठाया। चौधरी के अनुसार, सीमित सरकारी खरीदी कोटा होने के कारण कुछ किसानों को निजी व्यापारियों को कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस मामले में खरीदी व्यवस्था और कोटा निर्धारण की निष्पक्ष जांच की मांग की।
चुनावी वादों को लेकर भी घेरा
कुणाल चौधरी ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों और महिलाओं से किए गए वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि गेहूं, धान और गैस सिलेंडर को लेकर किए गए वादों को किस तरह और कब तक पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि उचित मूल्य, समय पर भुगतान, पर्याप्त खाद-बीज और प्रभावी मंडी व्यवस्था की जरूरत है।
उत्सव के बजट पर सवाल
कांग्रेस नेता ने सरकार द्वारा कृषि महोत्सव और प्रचार-प्रसार पर किए जा रहे खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसानों के नाम पर आयोजनों के लिए बजट उपलब्ध है, तो खाद और अन्य कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी पर्याप्त संसाधन और बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को खाद की बिक्री पर रोक से संबंधित आदेश और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर किसानों के सामने स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
कांग्रेस ने रखीं छह मांगें
कुणाल चौधरी ने प्रदेश सरकार से मांग की कि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और किसानों को अनावश्यक डिजिटल प्रक्रियाओं में नहीं उलझाया जाए। इसके अलावा सहकारी समितियों के माध्यम से पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने, प्रमुख फसलों के लिए उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, मूंग खरीदी व्यवस्था की जांच कराने तथा चुनावी वादों पर स्पष्ट समयसीमा बताने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों से जुड़े मुद्दों को सड़क से सदन तक उठाती रहेगी। उनके अनुसार, किसान कल्याण का आकलन आयोजनों और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि खेत और मंडी में किसानों की स्थिति से होना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

