किशोर दा आज भी लोगों के दिलों के करीब, एमसीयू में याद किए गए महान कलाकार
भोपाल, 12 अक्टूबर (हि.स.)। गायकी, अभिनय, लेखन और निर्देशन सहित सिनेमा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले किशोर कुमार आज भी अपने प्रशंसकों के दिलों में बसे हैं। फिल्म जगत में ऊंचा मुकाम हासिल करने के बाद भी उनका अपनी जन्मभूमि खंडवा और वहां के मित्रों से गहरा जुड़ाव बना रहा। उनके व्यक्तित्व और सिनेमा में योगदान को याद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने कहा कि किशोर कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार होने के साथ ही बेहतरीन इंसान भी थे।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के सिनेमा तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपाध्याय ने किशोर कुमार से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार की जन्मभूमि खंडवा आवाजों और प्रतिभाओं की धरती रही है। इस शहर का संबंध स्वतंत्रता सेनानी एवं संपादक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, संत सिंगा जी और मशहूर गायक-कलाकार किशोर कुमार जैसी विभूतियों से रहा है।
उपाध्याय ने किशोर कुमार के मुंबई जाने से लेकर फिल्म जगत में शीर्ष स्थान हासिल करने तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी वे अपनी जड़ों से जुड़े रहे। खंडवा आने पर वे अपने करीबी मित्रों के साथ समय बिताते और उन्हें अपने गीतों तथा फिल्मों से जुड़े किस्से सुनाते थे। उन्होंने अपने निधन के बाद भी खंडवा में अंतिम संस्कार किए जाने की इच्छा जताई थी, जो उनकी जन्मभूमि के प्रति गहरे लगाव को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि खंडवा में किशोर कुमार की स्मृतियों को संजोकर रखा गया है। उनके माता-पिता के नाम पर वहां गौरीकुंज सभागृह बनाया गया है, जबकि उनका स्मारक भी प्रशंसकों के आकर्षण का केंद्र है। स्मारक पर उनके गाए गीत और फिल्मों का प्रसारण होता है। उपाध्याय ने किशोर कुमार के स्कूली जीवन, मुंबई पहुंचने, गायकी में पहचान बनाने और सफल फिल्म निर्माता-निर्देशक बनने से जुड़े अनेक प्रसंग सुनाए।
किशोर कुमार की गायकी की विशिष्टता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि योडलिंग का इस्तेमाल करने वाले वे पहले और अनूठे गायकों में शामिल थे। उन्होंने उनकी कल्पनाशीलता का उल्लेख करते हुए फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया।
किशोर कुमार की गायकी और अभिनय अमर
विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि सिनेमा की स्मृतियों से किशोर कुमार को कभी अलग नहीं किया जा सकता। संगीत की औपचारिक शिक्षा नहीं लेने के बावजूद उन्होंने गायकी में असाधारण मुकाम हासिल किया। उनकी गायकी और अभिनय आज भी लोगों के बीच जीवंत हैं। तिवारी ने किशोर कुमार से जुड़ी फिल्मों ‘आंधी’ और ‘दाग’ के गीतों का भी उल्लेख किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

