मप्रः सड़क हादसों पर हाईकोर्ट सख्त, जनहित याचिका पर सुनवाई; न्याय मित्र नियुक्त

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मप्रः सड़क हादसों पर हाईकोर्ट सख्त, जनहित याचिका पर सुनवाई; न्याय मित्र नियुक्त


जबलपुर, 16 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जबलपुर में सोमवार को प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर पहली सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरिहंत तिवारी को न्याय मित्र नियुक्त किया है। साथ ही प्रतिवादी क्रमांक 9 को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 तय की गई है।

यह याचिका जबलपुर के समाजसेवी एवं लेखक आशीष शिवहरे द्वारा दायर की गई है। याचिका में प्रदेश में हो रही सड़क दुर्घटनाओं को केवल चालक की गलती बताकर जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया गया है और इसे सिस्टम की विफलता बताया गया है।

याचिका में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि मध्य प्रदेश में औसतन प्रतिदिन लगभग 41 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है। इसमें खराब सड़क इंजीनियरिंग, गड्ढे, अवैध अतिक्रमण और बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के जारी किए गए ड्राइविंग लाइसेंस को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया गया है।

जनहित याचिका में अदालत से मांग की गई है कि खराब सड़क डिजाइन या गड्ढों के कारण दुर्घटना होने पर संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। साथ ही जर्जर सड़कों पर टोल वसूली रोकने, ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली में सुधार के लिए डिजिटल री-ट्रेनिंग लागू करने और खतरनाक सड़कों व ब्लैक स्पॉट की शिकायत के लिए स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऐप बनाने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता आशीष शिवहरे ने कहा कि सड़क पर होने वाली हर मौत केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि किसी परिवार का उजड़ना है। उन्होंने कहा कि सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा आम जनता अपनी जान देकर चुका रही है। न्यायालय द्वारा न्याय मित्र की नियुक्ति को उन्होंने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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