पानी की हर बूंद का होगा समुचित उपयोग, जल-सुरक्षित मध्यप्रदेश के लिए मांगे सुझाव

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पानी की हर बूंद का होगा समुचित उपयोग, जल-सुरक्षित मध्यप्रदेश के लिए मांगे सुझाव


भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, समृद्ध और पर्यावरणीय दृष्टि से सतत् जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉनक्लेव 2.0' में मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026 का प्रारूप सार्वजनिक परामर्श एवं सुझावों के लिए आधिकारिक रूप से जारी किया गया।

दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सबका साथ, सबका विकास और सर्वसमावेशी कल्याण के विज़न पर आधारित यह पॉलिसी ड्रॉफ्ट मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के भविष्य को एक नई दिशा और ऊँचाई प्रदान करेगी।

भावी शहरी एवं जल आवश्यकताओं के लिए तैयार की गई है 'मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति : 2026'

जनसंपर्क अधिकारी अवंतिका जायसवाल ने गुरुवार काे जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में तीव्र गति से हो रहे नगरीकरण, औद्योगिक विस्तार और जल की बढ़ती मांग के परिप्रेक्ष्य में जल संसाधनों का सतत् प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। सीवेज उपचार के पश्चात् उपलब्ध जल को अपशिष्ट के स्थान पर उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित कर पेयजल एवं भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए यह नीति एक क्रांतिकारी कदम है। पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग, जल-सुरक्षित विकसित मध्यप्रदेश के लिए यह नीति न केवल जल संसाधनों पर दबाव कम करेगी, बल्कि विकसित मध्यप्रदेश@2047 की संकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण होगी।

पॉलिसी ड्रॉफ्ट के प्रमुख प्रावधान

पॉलिसी ड्रॉफ्ट : 2026 एवं समयबद्ध लक्ष्य : नीति के अंतर्गत संग्रहित सीवेज का निर्धारित मानकों के अनुरूप 100% उपचार सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य वर्ष 2027 तक 20%, वर्ष 2030 तक 30% तथा वर्ष 2037 तक 50% प्राप्त करना निर्धारित किया गया है।

गैर-पेयजल उपयोगों में प्रोत्साहन : उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों एवं लैंड स्केपिंग, सड़क सफाई, शौचालय फ्लशिंग, अग्निशमन तथा उपयुक्त कृषि/सिंचाई जैसे गैर-पेयजल कार्यों में उपचारित जल के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।

जनस्वास्थ्य एवं पर्यावरण सुरक्षा : जल गुणवत्ता के निर्धारित मानकों, नियमित निगरानी तथा पेयजल प्रणाली से पूर्णतः पृथक जल वितरण व्यवस्था (दोहरी पाइप लाइन) के माध्यम से जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

अवसंरचना विकास एवं निवेश के अवसर : उपचारित जल के भंडारण, परिवहन एवं वितरण नेटवर्क, टैंकर फिलिंग स्टेशन तथा दोहरी पाइप लाइन जैसी सुविधाओं के विकास से प्रदेश में नए निवेश एवं रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

वित्तीय स्थिरता एवं पीपीपी मॉडल : सार्वजनिक-निजी भागीदारी ,केंद्र एवं राज्य की योजनाओं, सीएसआर तथा उपचारित जल की बिक्री से प्राप्त राजस्व के माध्यम से जल पुनर्चक्रण परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जाएगा।

उच्चस्तरीय निगरानी व्यवस्था : राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति एवं तकनीकी प्रकोष्ठ के माध्यम से अंतर-विभागीय समन्वय, जल मांग का आकलन, दर निर्धारण तथा नियमित निगरानी की मजबूत व्यवस्था की जाएगी।

सतत् जल प्रबंधन में मध्यप्रदेश की नई मिसाल

यह पॉलिसी ड्रॉफ्ट : 2026 उपचारित अपशिष्ट जल को बहुमूल्य संसाधन में परिवर्तित कर जल संरक्षण, पर्यावरणीय सुधार तथा शहरी सेवाओं की दक्षता बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी। 'अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' के माध्यम से सरकार, उद्योग एवं निजी निवेशकों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी, जिससे मध्यप्रदेश जल-सुरक्षित एवं समृद्ध प्रदेश बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

Livevns.news Desk
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