अशोकनगरः पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी, कथित प्रतिनिधियों के आतंक के खिलाफ आक्रोश

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अशोकनगरः पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी, कथित प्रतिनिधियों के आतंक के खिलाफ आक्रोश


अशोकनगर,21 अप्रैल(हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में मंगलवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों को डराने और धमकाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मनरेगा कार्यों में धांधली की चर्चा करने पर एक तथाकथित सरपंच प्रतिनिधि ने पत्रकार के दफ्तर में घुसकर न केवल अभद्रता की, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद जिले के पत्रकारों में भारी रोष है और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

घटना का पूरा विवरण:जानकारी के अनुसार, स्थानीय पत्रकार मनोज जैन (कलाकार) अपने मोहरी स्थित कार्यालय में अन्य पत्रकार साथियों के साथ क्षेत्र की पंचायतों में मनरेगा के तहत हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान ग्राम पंचायत सिरसी पछार के रोजगार सहायक ओमप्रकाश ओझा और खुद को सरपंच प्रतिनिधि बताने वाले हरविंदर सरदार वहां पहुंचे। आरोप है कि चर्चा से बौखलाए हरविंदर सरदार ने पत्रकार को धमकी दी कि वह उनकी पंचायत के मनरेगा कार्यों में दखल देना बंद करें। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कथित प्रतिनिधि ने अपना आपा खो दिया और चीखते हुए कहा, अगर मेरी पंचायत की कोई भी खबर छापी, तो जान से मार दिए जाओगे।

पत्रकारों का एकजुट प्रदर्शन और एसपी से मुलाकात:जैसे ही इस वारदात की खबर फैली, जिले के पत्रकार बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। पत्रकारों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की और सामूहिक रूप से एसपी राजीव मिश्रा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस ने मंगलवार को आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

विवादित मुद्दा: प्रतिनिधि राज या असंवैधानिक दबदबा?यह घटना जिले में पनप रहे एक नए सिस्टम की ओर इशारा करती है। अशोकनगर में इन दिनों कथित प्रतिनिधियों का बोलबाला है। कानूनन प्रतिनिधि जैसा कोई पद नहीं होता, फिर भी कई लोग खुद को सरपंच, अध्यक्ष या पार्षद प्रतिनिधि बताकर न केवल सरकारी महकमों पर दबाव बनाते हैं, बल्कि सरकारी आयोजनों में भी मुख्य कुर्सियों पर काबिज नजर आते हैं। जिला पत्रकार संघ ने प्रशासन से मांग की है कि इन गैर-संवैधानिक कथित प्रतिनिधियों पर अंकुश लगाया जाए, जो सरकारी तंत्र में हस्तक्षेप कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और सच लिखने वालों की आवाज दबा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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