जीतू पटवारी का सरकार पर बड़ा हमला, कहा-खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स में 150 करोड़ का घोटाला, किसानों के हक पर डाका

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जीतू पटवारी का सरकार पर बड़ा हमला, कहा-खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स में 150 करोड़ का घोटाला, किसानों के हक पर डाका


भोपाल, 04 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे “संगठित लूट का तंत्र” करार दिया है। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ कुप्रबंधन नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों और गरीबों की खाद्य सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

जीतू पटवारी ने शनिवार काे अपने बयान में रायसेन जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां वेयरहाउसों में करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया लगभग 20,000 मीट्रिक टन गेहूं सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि रखरखाव और कीटनाशक के नाम पर इस पर 150 करोड़ रुपये तक का खर्च दिखाया गया। 34 बार कीटनाशक छिड़काव के बावजूद अनाज का खराब हो जाना, उनके मुताबिक, फर्जी बिलिंग और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले चार वर्षों में मध्यप्रदेश में 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खराब हो चुका है, जिससे सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सड़े हुए अनाज की नीलामी से भी लगभग 200 करोड़ रुपये की हानि बताई जा रही है।

जबलपुर और सिवनी में सामने आए “घोस्ट ट्रांसपोर्ट” घोटाले का जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा कि बिना वास्तविक परिवहन के करोड़ों रुपये निकाले गए। जांच में 92% ट्रिप फर्जी पाए गए, जहां कार, स्कूटर और दोपहिया वाहनों के नंबरों से भारी मात्रा में धान ढोने का दावा किया गया।

वेयरहाउस आवंटन को लेकर भी उन्होंने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सत्ता से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि आम वेयरहाउस मालिकों के भुगतान लंबित हैं। साथ ही, क्षमता से अधिक भंडारण दिखाकर किराया घोटाले की आशंका भी जताई गई है, जबकि वास्तविक अनाज खुले में खराब हो रहा है।

पटवारी ने प्रदेश में कुपोषण की स्थिति को इस मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि जब 26% से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं, तब लाखों क्विंटल अनाज का सड़ना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीबों को घटिया और मिलावटी अनाज दिया जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

उन्होंने कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम, वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और सहकारिता विभाग के बीच समन्वय की कमी और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति के कारण यह पूरी व्यवस्था विफल हो चुकी है, जिसका सीधा नुकसान किसानों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें:

रायसेन के कथित 150 करोड़ रुपये के घोटाले की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच

वेयरहाउस आवंटन और भुगतान की पूरी सूची सार्वजनिक करना

दोषी अधिकारियों और संरक्षण देने वाले राजनीतिक व्यक्तियों पर आपराधिक कार्रवाई

सड़े हुए अनाज के नुकसान की भरपाई किसानों के हित में करना

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू करना

अंत में पटवारी ने कहा कि प्रदेश का अन्नदाता अब इस “अनाज के खेल” को समझ चुका है और कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाकर दोषियों को बेनकाब करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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