राजगढ़ः जहां कभी था जंगल,आज गूंजती है आस्था, 52 साल में बना भव्य श्री अंजनीलाल धाम

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राजगढ़ः जहां कभी था जंगल,आज गूंजती है आस्था, 52 साल में बना भव्य श्री अंजनीलाल धाम


राजगढ़, 26 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में कभी घने जंगल, कंटीली झाड़ियों और दुर्गम रास्तों के बीच एक छोटे से चबूतरे पर विराजमान भगवान श्री अंजनीलाल जी का स्थान आज भव्य धार्मिक एवं सामाजिक केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है।

करीब 52 साल पहले कुछ युवाओं ने यहां सेवा और विकास का जो संकल्प लिया था, वह पांच दशक बाद श्री अंजनीलाल धाम के रूप में साकार हुआ है। अजनार नदी के किनारे स्थित यह धाम आज श्रद्धा के साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी केंद्र बन गया है। 1500 रुपए से शुरू हुआ था विकास का सफर वर्ष 1972-73 में युवाओं ने खुले आसमान के नीचे विराजमान भगवान श्री अंजनीलाल जी की प्रतिमा के लिए छाया की व्यवस्था करने का निर्णय लिया।

करीब 1500 रुपए की लागत से टीन शेड लगाने के लिए आपसी सहयोग और जनसहयोग से राशि जुटाई गई। इसके बाद वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन में मंदिर समिति का गठन हुआ। युवाओं ने स्वयं श्रमदान किया और श्रद्धालुओं के सहयोग से लगातार विकास कार्य होते गए। दान राशि के पारदर्शी उपयोग और सेवा भावना से लोगों का विश्वास बढ़ता गया। चबूतरे से भव्य मंदिर तक पहुंचा धाम आज परिसर में मकराना मार्बल से निर्मित भव्य श्री अंजनीलाल मंदिर, विशाल शिवालय, दक्षिण भारतीय शैली का श्री राम-जानकी मंदिर, सभा भवन, आरोग्य भवन, यज्ञशाला, पार्क, कार्यालय भवन और विशाल मंदिर द्वार हैं। स्वच्छ-सुंदर परिसर और अजनार नदी का प्राकृतिक परिवेश श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। वर्ष 1974 की चैत्र नवरात्रि में मंदिर पर कलशारोहण के साथ प्रवचन परंपरा शुरू हुई। इसके बाद नवरात्रि महोत्सव, हनुमान जयंती, शरद पूर्णिमा सहित कई धार्मिक आयोजन होने लगे।संत- महात्माओं और विद्वानों के प्रवचनों से धाम की आध्यात्मिक पहचान मजबूत हुई।

श्री अंजनीलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता टाटा के अनुसार अब ट्रस्ट धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और रचनात्मक कार्यों का विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रहा है। पांच दशक पहले युवाओं के छोटे से संकल्प से शुरू हुई यह यात्रा आज सेवा, श्रद्धा और जनसहयोग की मिसाल बन चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

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