जबलपुरः पुस्तक मेले में रियायती दरों पर स्कूल सामग्री खरीदने के लिए उमड़ रही भीड़
जबलपुर, 30 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पिछले दो वर्ष की अभूतपूर्व सफलता के बाद लगातार तीसरे वर्षगोल बाजार स्थित शहीद स्मारक परिसर में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बारह दिनों के पुस्तक मेले में छठवें दिन सोमवार को भी रियायती दरों पर निजी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें, यूनिफार्म और अन्य शैक्षिक सामग्री खरीदने विद्यार्थियों और अभिभावकों का तांता लगा रहा।
सोमवार को जिला पंचायत अध्यक्ष आशा गोंटिया ने पुस्तक मेला का अवलोकन किया। आशा गोंटिया पुस्तक मेला के छठवें दिन की सांस्कृतिक संध्या की मुख्य अतिथि थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, माध्यमिक शिक्षा मंडल के उपाध्यक्ष श्रीनिवास राव एवं साहित्यकार आलोक पाठक 'उपस्थित रहे। अतिथियों ने माँ सरस्वती के पूजन के साथ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी और जिला परियोजना समन्वयक योगेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक इस अवसर पर मौजूद थे।
नवाचारों की जननी है संस्कारधानी
जिला पंचायत अध्यक्ष आशा गोंटिया ने इस अवसर पर अपने संबोधन में बताया कि जबलपुर सदैव नवाचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी नवाचारों की जननी है। शिक्षा की बेहतरी के लिए जबलपुर ने हमेशा प्रदेश और देश को मार्ग दिखाया है। उन्होंने पुस्तक मेला में लगे बुक बैंक स्टॉल की सराहना करते हुये अभिभावकों और बच्चों से इसका अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे साल भर अपनी पुस्तकों को सहेज कर रखें और पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें बुक बैंक को दान करें, ताकि वे जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने में मददगार बन सकें।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने पुस्तक मेला की निरंतरता बनाये रखने के लिये जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की महंगी किताबों के आर्थिक बोझ से विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत दिलाने जबलपुर में वर्ष 2024 से प्रारंभ हुई इस अभिनव पहल को प्रदेश के सभी जिलों में अपनाया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का जबलपुर के इस नवाचार को प्रदेश भर में लागू करने के लिये आभार जताया।
नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने पुस्तक मेला के आयोजन के लिये जिला प्रशासन की सराहना की।
सकारात्मक सोच का परिणाम है पुस्तक मेला
साहित्यकार आलोक पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब प्रशासन सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करता है, तो पुस्तक मेला जैसे अभिनव प्रयोग सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को निजी स्कूलों की महंगी पुस्तकों को काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराकर अपनी सार्थकता साबित की है। पाठक ने अपनी स्वरचित रचनाओं और भगवान राम के वन गमन प्रसंग के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उन्होंने पुस्तक मेला को सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया जहाँ बच्चे मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानार्जन भी कर रहे हैं।
नवाचारों को मिल रही सराहना
पुस्तक मेला में बुक बैंक के स्टॉल के साथ-साथ रीड ऑन रेंट जैसे नवाचार आकर्षण का केंद्र बने हुये हैं। बच्चों और अभिभावकों द्वारा इन्हें सराहा जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने बताया मेले में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस वर्ष मेले में एचपीवी वैक्सीन का विशेष काउंटर लगाया गया है, जहाँ 14 वर्ष की आयु समूह की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव की जानकारी और टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती के उत्पादों का स्टॉल भी लगाया गया है। विद्यार्थियों को 'रीड ऑन रेंट' की सुविधा भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहाँ मात्र 5 रुपये में दिन भर ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ी जा सकती हैं।
एक अप्रैल से शुरू होगा स्कूल चलें हम अभियान
पुस्तक मेला में मंच से एक अप्रैल से शुरू हो रहे नवीन शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर स्कूल चलें हम अभियान के शुभारंभ और शालाओं में प्रवेश उत्सव के आयोजन की जानकारी भी दी गई। अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और प्रवेशोत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाएं। पुस्तक मेला आगामी 5 अप्रैल तक प्रतिदिन जारी रहेगा। रविवार और शनिवार को यह मेला दोपहर बजे से रात 10 बजे तक तथा शेष दिनों में शाम 4 बजे से रात दस बजे तक खुला रहेगा। पुस्तक मेला में प्रतिदिन श्शाम 6 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है और इसमें विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

