जबलपुरः शोभापुर पहाड़ी का स्वरूप बदलकर कॉलोनी निर्माण करने पर कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर 4 करोड़ का अर्थदंड

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जबलपुरः शोभापुर पहाड़ी का स्वरूप बदलकर कॉलोनी निर्माण करने पर कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर 4 करोड़ का अर्थदंड


जबलपुरः शोभापुर पहाड़ी का स्वरूप बदलकर कॉलोनी निर्माण करने पर कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर 4 करोड़ का अर्थदंड


जबलपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में राँझी तहसील अंतर्गत ग्राम भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन करने तथा बिना अनुमति के मिट्टी, मुरम और बोल्डर का खनन कर आवासीय कॉलोनी के निर्माण में उपयोग करने के प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कॉलोनाइजर सीओडी कॉलोनी निवासी अभिलाष तिवारी एवं भूमि स्वामी न्यू शोभापुर निवासी शोभना सिंह, मुकेश सिंह, महेश सिंह, नरेंद्र सिंह, श्रीमती रागिनी सिंह एवं रमेश सिंह के विरुद्ध 4 करोड़ 08 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।

कलेक्टर ने प्रकरण में गुरुवार देर रात पारित आदेश में तय समय के भीतर अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर वसूली के लिये आरआरसी जारी करने तथा इसके बावजूद भी अर्थदंड की राशि जमा नहीं किये जाने की स्थिति में तहसीलदार के माध्यम से कुर्की की कार्यवाही करने के आदेश खनिज अधिकारी को दिये हैं।

कलेक्टर कोर्ट में यह प्रकरण ग्राम भड़पुरा में पटवारी हल्का नम्बर 02 की खसरा नम्बर 391/13 क एवं अन्य खसरे की 4.24 हेक्टेयर भूमि में से 2.58 हेक्टेयर निजी भूमि पर अवैध उत्खनन और कॉलोनी निर्माण किये जाने की प्राप्त शिकायत पर तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी एवं खनिज निरीक्षकों द्वारा संयुक्त निरीक्षण के बाद दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर प्रारंभ किया गया था। राजस्व एवं खनिज विभाग को टीम ने जांच कर इस प्रकरण में भूमि स्वामी नरेंद्र सिंह ठाकुर के पुत्र निशांत सिंह एवं कॉलोनाइजर अभिलाष तिवारी द्वारा खनिज का अवैध भंडारण किये जाने पर एक हजार घनमीटर मुरम एवं एक हजार घनमीटर बोल्डर के लिये 50 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करना प्रस्तावित किया था। जिसके आधार पर भूमि स्वामियों और कॉलोनाइजर को नोटिस जारी तथा सुनवाई के बाद कलेक्टर कोर्ट ने आदेश जारी कर 50 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया था।

कलेक्टर कोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध कमिश्नर न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई थी तथा कमिश्नर द्वारा कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा गया था। पहाड़ी के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर कॉलोनी का निर्माण किये जाने की इस शिकायत पर बाद में कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी राँझी एवं जिला खनिज अधिकारी से भी शिकायत की जांच कराई गई थी। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी एवं जिला खनिज अधिकारी अपने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया था कि इस प्रकरण में समस्त अनुमतियां प्राप्त कर कॉलोनी के विकास कार्य हेतु समतलीकरण किया गया है। इसके बावजूद कमर्शियल प्रोजेक्ट होने से कॉलोनाइजर और भूमि स्वामी को खनिज का उपयोग किये जाने के पूर्व उपयोग किये गये खनिज की रॉयल्टी अग्रिम रूप से जमा करनी थी। किंतु, उनके द्वारा ऐसा न करके समतलीकरण के कार्य के दौरान निकले खनिज का उपयोग बिना रॉयल्टी का भुगतान किये किया गया, जो मध्यप्रदेश खनिज ( अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

अनुविभागीय राजस्व अधिकारी राँझी एवं जिला खनिज अधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया था कि बिना अनुमति उपयोग किये गये 13 हजार 600 घनमीटर खनिज (मिट्टी, मुरम और बोल्डर) की 6 लाख 80 हजार रुपये की रॉयल्टी की पंद्रह गुना 1 करोड़ 02 लाख रुपये अर्थदण्ड के रूप में तथा पर्यावरण क्षतिपूर्ती के 1 करोड़ 02 लाख रुपये और इस प्रकार कुल 2 करोड़ 04 लाख रुपये की राशि, एक हजार रुपये के प्रशमन शुल्क के साथ कॉलोनाइजर तथा भूमि स्वामियों से जमा कराकर प्रकरण का निराकरण किया जा सकता है।

गूगल अर्थ डिजिटल इमेज से भी हुई पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन की पुष्टि :-

भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में परिवर्तन कर कॉलोनी के विकास करने के इस प्रकरण में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा पारित आदेश में खनिज निरीक्षक द्वारा दिये गये जांच प्रतिवेदन के साथ संलग्न की गई गूगल अर्थ से प्राप्त डिजिटल इमेज का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2019 से वर्ष 2025 की गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज के अवलोकन से भी यह स्पष्ट है कि वर्ष 2019 में प्रश्नाधीन भूमि का भौतिक स्वरूप पहाड़ीनुमा आकृति का था, जिसे वर्ष 2020, 2021 एवं वर्ष 2022 में परिवर्तित कर यहां निर्माण आदि की गतिविधियां की गई हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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