जबलपुर बरगी डैम क्रूज हादसा प्रशासनिक विफलता का परिणाम, दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई : विवेक त्रिपाठी
पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ मुआवजा और आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग
भोपाल/जबलपुर, 09 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस हादसे को महज दुर्घटना नहीं, बल्कि भ्रष्ट और लापरवाह प्रशासनिक तंत्र द्वारा की गई “प्रशासनिक हत्या” करार दिया है।
विवेक त्रिपाठी ने शनिवार काे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 12 सितंबर 2023 को क्रूज संचालन पर प्रतिबंध लगाया था, इसके बावजूद जल संसाधन विभाग, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की कथित मिलीभगत से अवैध रूप से क्रूज संचालन जारी रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एनजीटी का स्पष्ट आदेश मौजूद था, तब आखिर किसके संरक्षण में यह संचालन किया जा रहा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के अधिकार क्षेत्र में बिना अनुमति के क्रूज संचालन होना और विभाग को इसकी जानकारी न होना संभव नहीं है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है।
जांच के दौरान क्रूज डिस्मेंटल करना साक्ष्य मिटाने की कोशिश
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हादसे के बाद जांच शुरू होने के दौरान ही क्रूज को डिस्मेंटल कर दिया गया, जो स्पष्ट रूप से साक्ष्य मिटाने और दोषियों को बचाने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि जिस अधिकारी की अनुमति से यह कार्रवाई हुई, उसे तत्काल निलंबित कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिला न्यायालय द्वारा चालक और मैनेजर के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करने के निर्देश इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को दर्शाते हैं। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि केवल चालक और मैनेजर को जिम्मेदार ठहराकर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
बरगी डैम क्रूज हादसे की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर संचालन की अनुमति देने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
दोषी अधिकारियों, जिम्मेदार विभागीय कर्मचारियों और क्रूज संचालकों पर गैरइरादतन हत्या सहित कठोर धाराओं में FIR दर्ज की जाए।
जांच से पहले क्रूज डिस्मेंटल कराने वाले अधिकारियों पर साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज किया जाए।
मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
प्रदेश में संचालित सभी जल पर्यटन परियोजनाओं और क्रूज संचालन का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
प्रशासनिक लापरवाही से हुई मौतों के कारण मुआवजे की राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जाए।
विवेक त्रिपाठी ने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि मध्यप्रदेश में कानून, न्यायालय और एनजीटी के आदेशों से ऊपर भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मृतकों को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

