उज्जैनः अन्तरराष्ट्रीय संस्कृत लघुचलचित्र समारोह का समापन
उज्जैन , 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर के चिंतामण गणेश मंदिर मार्ग स्थित विद्या भारती के सम्राट विक्रमादित्य भवन में सोमवार को अन्तरराष्ट्रीय संस्कृत लघुचलचित्र समारोह का समापन हुआ। इसमें पांच राज्यों और एक देश अमेरिका से 90 प्रविष्ठियां आई थी,इनमें 20 प्रविष्ठियां रील्स की अलग से थी। समापन अवसर पर कुल 30 पुरस्कार वितरित किए गए।
कालिदास संस्कृत अकादेमी के निदेशक डॉ.गोविंद गंधे ने बताया कि इस समारोह में आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, आसाम, महाराष्ट्र, गुजरात और अमेरिका से प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। श्रेष्ठ अभिनय, अभिनेत्री, निर्देशन, पटकथा, संगीत संयोजन, चित्रांकन, ध्वनि संयोजन, गीत आदि श्रेणी में कुल 30 पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में कुल 90 प्रविष्ठियां और 20 प्रविष्ठियां रिल्स श्रेणी में प्राप्त हुई। सर्वश्रेष्ठ चलचित्र पुरस्कार सुन्दरलाल पेरुमाल के निर्देशन में निर्मित थानोस चलचित्र को दिया गया। सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार एम वि. सतीशकुमार की फिल्म अस्तेय को दिया गया। इसीप्रकार मोनाक्ष एन कानीरकर द्वारा निर्देशित शिवायतन् नामक चलचित्र को तृतीय पुरस्कार दिया गया। सर्वोत्कृष्ट चलचित्र का पुरस्कार समीरासन्देशप्रभु की आत्मव्रता को दिया गया।
समापन समारोह के अतिथि राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज थे। उन्होने कहाकि हमारे देश की भाषा, संस्कृति, परम्पराऐं, संस्कार अमुल्य धरोहर है। हमे इसका संरक्षण करना चाहिए। यह आयोजन इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मिडिया के क्षेत्र में एक सकारात्मक प्रयास है। इसके माध्यम से न केवल संस्कृत भाषा जन-जन तक पहुंचेगी अपितु हमारी संस्कृति,परंपरा एवं संस्कारों का भी संप्रेषण होगा।
निगम अध्यक्ष कलावती यादव ने कहा कि इस आधुनिक माध्यम से भी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का विचार एक नवाचार है। माध्यम का उपयोग किस प्रकार किया जाता है, उससे माध्यम की सार्थकता बनती है। अतिथि ऐश्वर्या शर्मा ने कहा कि मैं फिल्म क्षेत्र में कार्य करती हूं, किन्तु मुझे विश्वास ही नहीं हो कि संस्कृत भाषा में भी फिल्मों का निर्माण हो सकता है। आज फिल्में देखने के बाद मुझे यह विश्वास हो गया कि संस्कृत भाषा बहुत सरल है और इसे कोई भी व्यक्ति सीख सकता है।
इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विवि के कुलगुरु प्रो. अर्पण भाद्वाज, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलसचिव डॉ. दिलीप सोनी, चलचित्रों के निर्णायक, निर्माता-निर्देशक तथा संस्कृत भारती के पदाधिकारी उपस्थित थे। संचालन डॉ. उपेन्द्र भार्गव ने किया। आभार संस्कृत भारती के क्षेत्राध्यक्ष प्रो. विरुपाक्ष जड्डीपाल ने माना।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

