(अपडेट) मप्र में स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सड़कों पर उतरे इंटर्न डॉक्टर, दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, वाटर कैनन उपयोग की होगी जांच

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(अपडेट) मप्र में स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सड़कों पर उतरे इंटर्न डॉक्टर, दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, वाटर कैनन उपयोग की होगी जांच


(अपडेट) मप्र में स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सड़कों पर उतरे इंटर्न डॉक्टर, दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, वाटर कैनन उपयोग की होगी जांच


- प्रदर्शन के चलते सरकारी अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित

भोपाल, 08 सितम्बर (हि.स.) । मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी नहीं थमा। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क के पास सड़क पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा जाम कर दिया। उनके समर्थन में इंदौर, रतलाम समेत कई शहरों के सरकारी अस्पतालों में इंटर्न और जूनियर डॉक्टर भी प्रदर्शन में उतर आए। वहीं, सोमवार को भोपाल में प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन से कुछ डॉक्टरों के घायल होने को लेकर जांच के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, इंटर्न डॉक्टरों को फिलहाल 14,337 रुपए मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है। उनकी मांग है कि इसमें उचित बढ़ोतरी की जाए। आंदोलन के कारण प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में नियमित ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गई हैं। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि ओटी का भी बहिष्कार किया गया। इससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे डॉक्टर

मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मुद्दे पर दोबारा बातचीत की जाएगी। हालांकि इंटर्न डॉक्टरों ने साफ किया है कि केवल बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश जारी होने और पुलिस कार्रवाई के मामले में कार्रवाई होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है, इसलिए मध्यप्रदेश में भी सरकार को फैसला लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री हाउस जाने से रोका तो वाटर कैनन चला

सोमवार को इंटर्न डॉक्टर हमीदिया अस्पताल से निकलकर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट पर प्रदर्शनकारियों की ओर से धक्का-मुक्की की गई, जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। डीसीपी जोन-3 आयुष गुप्ता ने बताया कि पहले प्रदर्शनकारियों के पूर्वी गेट की तरफ जाने की बात थी, लेकिन इमरजेंसी गेट पर धक्का-मुक्की होने लगी। इसी वजह से वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

वाटर कैनन की परिस्थितियों की होगी निष्पक्ष जांच

इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल और कुछ डॉक्टरों के घायल होने की जानकारी को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने गंभीरता से लिया। उन्होंने भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार से चर्चा कर मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। जिसके बाद पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनकर जल्द जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई में कई साथियों के घायल होने का दावा करते हुए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।

जीएमसी की डीन बोलीं- वाटर कैनन चलाना गलत था

गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता सिंह ने भी वाटर कैनन के इस्तेमाल पर असहमति जताई। उन्होंने कहा, “वाटर कैनन का इस्तेमाल करके गलत किया गया। मुझे भी यह अच्छा नहीं लगा।” डीन ने बताया कि वह प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को लेने पहुंची थीं, ताकि उन्हें डिप्टी सीएम के यहां होने वाली बैठक में ले जाया जा सके। हालांकि डॉक्टरों ने जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि डिप्टी सीएम खुद उनके बीच आकर बात करें।

‘डॉक्टर थे, आतंकवादी नहीं’

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिद्धू ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। उनके मुताबिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल गलत है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोग डॉक्टर हैं, कोई असामाजिक तत्व या आतंकवादी नहीं। एसोसिएशन ने दो मांगें रखी हैं कि इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाए और लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए। सिद्धू के मुताबिक मंगलवार को इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने सुबह 9 से 11 बजे तक ओपीडी में सेवाएं दीं, इसके बाद OPD सेवाएं बंद कर दी गईं।

इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी असर

भोपाल की कार्रवाई के विरोध में इंदौर के एमवाय अस्पताल परिसर में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने रैली निकाली। डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने के समर्थन में नारे लगाए। अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार सुबह 11 बजे तक जूनियर डॉक्टर मौजूद रहे। इसके बाद उनके ओपीडी से हटने के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई। फिलहाल सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण सीनियर डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव है।

हमीदिया में ओपीडी-ओटी का बहिष्कार

भोपाल के हमीदिया अस्पताल के बाहर भी इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के कारण नियमित ओपीडी और ओटी सेवाएं प्रभावित हैं। हालांकि अस्पताल की इमरजेंसी सेवा चालू रखी गई है। स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन लिखित आदेश के बिना आंदोलन वापस लेने से डॉक्टरों ने इनकार कर दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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