इंदौर में गहराते जल संकट पर राजनीतिक बयानबाजी तेज, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा खुला पत्र, जल प्रबंधन पर उठाए सवाल

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इंदौर में गहराते जल संकट पर राजनीतिक बयानबाजी तेज, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा खुला पत्र, जल प्रबंधन पर उठाए सवाल


इंदौर में गहराते जल संकट पर राजनीतिक बयानबाजी तेज, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा खुला पत्र, जल प्रबंधन पर उठाए सवाल


भोपाल, 24 मई (हि.स.)। देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गर्मी के साथ जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में पानी की नियमित आपूर्ति प्रभावित होने के कारण नागरिकों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। रविवार काे शहर में पानी की कमी को लेकर प्रदर्शन भी किये जा रहे है।

इसी बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए इंदौर के जल प्रबंधन और दीर्घकालिक जल नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “स्वच्छता के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब जल संकट की चुनौती से जूझ रहा है, जो केवल मौसमी समस्या नहीं बल्कि व्यवस्थागत जल प्रबंधन की कमी को दर्शाता है।”

पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले शहरों में शामिल है, इसके बावजूद कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति असंतुलित बनी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि शहर के तेज़ी से हो रहे विस्तार के साथ-साथ जल संसाधनों के संरक्षण और पुनर्भरण की योजनाओं को अपेक्षित प्राथमिकता क्यों नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में शहरी विस्तार, नई कॉलोनियों और निर्माण गतिविधियों के बढ़ने के साथ भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में और अधिक प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता बताई।

पीसीसी चीफ पटवारी ने इंदौर में जल संरक्षण से जुड़ी पहलों को जन आंदोलन का रूप देने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को सख्ती से लागू किया जाए, पारंपरिक तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जाए तथा जल उपयोग की निगरानी को और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक “वॉटर सिक्योरिटी प्लान” की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में शहर को ऐसी समस्याओं से बचाया जा सके। इधर स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को देखते हुए प्रशासन द्वारा टैंकर व्यवस्था बढ़ाने की बात कही गई है और कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। पटवारी ने कहा कि जल संकट केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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