रेल यात्रियों के लिए सख्त हुए नियम : 1 अप्रैल से टिकट कैंसिलेशन महंगा
मध्य प्रदेश के लाखों यात्रियों पर पड़ेगा असर
भोपाल, 31 मार्च (हि.स.)। देशभर में रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अप्रैल से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। भारतीय रेल ने रिजर्वेशन और टिकट कैंसिलेशन के नियमों को सख्त कर दिया है, जिसका सीधा असर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य पर पड़ेगा, जहां हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। नए नियमों के तहत अब अंतिम समय में टिकट रद्द कराने पर रिफंड नहीं मिलेगा, जिससे यात्रियों को अधिक सतर्क होकर यात्रा की योजना बनानी होगी।
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख रेल नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और कटनी जैसे बड़े जंक्शन रोजाना हजारों ट्रेनों और लाखों यात्रियों की आवाजाही देखते हैं। अनुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में रोजाना 12 से 20 लाख यात्री सफर करते हैं। इसमें लंबी दूरी की ट्रेनों के अलावा इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनें भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के चलते रेलवे को इस क्षेत्र से भारी राजस्व प्राप्त होता है।
रेलवे के आंकड़ों और जोनल आय के आधार पर अनुमान लगाया जाए, तो मध्य प्रदेश से गुजरने वाले रेल नेटवर्क से हर दिन ₹20 से ₹30 करोड़ तक की आय होती है। इसमें रिजर्वेशन टिकट, अनारक्षित टिकट, माल भाड़ा और अन्य सेवाओं से मिलने वाली कमाई शामिल है। ऐसे में टिकट कैंसिलेशन के नियमों में बदलाव सीधे तौर पर इस आय को भी प्रभावित करेगा। नए नियमों के अनुसार, अब ट्रेन के निर्धारित समय से आठ घंटे के भीतर टिकट रद्द कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह सीमा चार घंटे थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है। यानी जो यात्री अंतिम समय में अपनी यात्रा रद्द करते हैं, उन्हें अब पूरा किराया गंवाना पड़ेगा। इससे उन लाखों यात्रियों पर असर पड़ेगा, जो किसी कारणवश यात्रा से ठीक पहले टिकट कैंसिल कराते हैं।
इसके अलावा, रेलवे ने अलग-अलग समयावधि के लिए रिफंड के नए स्लैब भी तय किए हैं। यदि कोई यात्री ट्रेन के समय से आठ से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करता है, तो उसे केवल करीब 50 प्रतिशत राशि ही वापस मिलेगी। वहीं, 24 से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर लगभग 75 प्रतिशत तक का रिफंड मिलेगा। साफ है कि अब जितनी जल्दी टिकट कैंसिल किया जाएगा, उतना अधिक पैसा वापस मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सीटों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना और अंतिम समय में होने वाले कैंसिलेशन को कम करना है। अक्सर देखा जाता है कि यात्री पहले से टिकट बुक कर लेते हैं, लेकिन यात्रा नहीं करने पर अंतिम समय में उसे रद्द कर देते हैं, जिससे सीटें खाली रह जाती हैं और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को मौका नहीं मिल पाता। नए नियम इस समस्या को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।
इसके साथ ही यात्रियों को एक राहत भी दी गई है। अब ट्रेन के निर्धारित समय से आधा घंटा पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा मिलेगी। यानी अगर किसी ट्रेन में उच्च श्रेणी की सीट खाली रहती है, तो यात्री अंतिम समय तक अपनी क्लास को अपग्रेड कर सकते हैं। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, रेलवे को भी अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
अनुमान है कि केवल कैंसिलेशन नियमों में बदलाव से ही रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का अतिरिक्त लाभ हो सकता है। हालांकि, आम यात्रियों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए, जिनकी यात्रा योजनाएं अचानक बदल जाती हैं। ऐसे यात्रियों को अब अधिक सावधानी के साथ टिकट बुकिंग करनी होगी, क्योंकि अंतिम समय में कैंसिलेशन करने पर उन्हें पूरा किराया खोना पड़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

