अनूपपुर: जिले में तीन दिवसीय गणना में दो दिन में 413 गिद्ध व 123 घोसले मिले

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अनूपपुर: जिले में तीन दिवसीय गणना में दो दिन में 413 गिद्ध व 123 घोसले मिले


अनूपपुर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में गिद्धों की संख्या में पिछले एक दशक पहले काफी गिरावट आ गई थी। सरकार अब इनकी संख्या पता करने के लिए हर वर्ष गणना करा रहा है। तीन दिवसीय गणना में रविवार को जिले के अनूपपुर और अहिरगवां वन परिक्षेत्र में मुख्य रूप से गिद्ध पाए जाते हैं। तीन दिवसीय गणना के दौरान अनुपातिक तौर पर 413 गिद्धों का प्रत्यक्ष दर्शन एवं 123 गिद्धों की घोसला तथा 15 निष्क्रिय गिद्धों के घोंसला गणना के दौरान मिले हैं।

गिद्ध प्रकृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी पक्षी है, जिसे पर्यावरण का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से मृत जानवरों का मांस खाकर वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। गिद्ध की नजर ने बहुत तेज होती है और यह आसमान में ऊंचाई पर उड़ते हुए कई किलोमीटर दूर से भी मृत जानवर को देख सकता है। इसके पंख लंबे और मजबूत होते हैं, जिससे यह घंटों तक बिना ज्यादा ऊर्जा खर्च किए उड़ सकता है। तीन दिवसीय गणना के दौरान कुल 413 गिद्धों की पहचान अनुपातिक तौर पर पाई गई। सबसे अधिक अहिरगवां वनपरिक्षेत्र में गिद्ध मिले हैं।

जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र अनूपपुर में पहले दिन 83 और दूसरे दिन शनिवार को 62 गिद्ध, रविवार को 95 दिखाई दिए किरर और औढ़ेरा और बड़हर बीट के जंगलों में पाए गए हैं। अनूपपुर रेंज में भारतीय देसी गिद्ध औरसफेद गिद्ध सफेद गिद्ध मिले हैं। दो दिवसीय गणना के दौरान 50 सक्रिय घोसलों की भी खोज वन विभाग द्वारा की गई है। इसी तरह वन परिक्षेत्र अहिरगवां में जुगवारी, कठौतिया पूर्व और कठौतिया पश्चिम बीट में मिले हैं। शुक्रवार को तीनों बीट में 263 और शनिवार को 328 रविवार को 307 गिद्ध खोजे गए गिद्ध सफेद, देसी गिद्ध और लांग विल्ड प्रजाति के हैं। तीनों बीट क्षेत्र में कुल 123 घोसला भी खोजे गए हैं जहां यह गिद्ध रहते हैं तीनदिवसीय गणना के दौरान वन परिक्षेत्र राजेन्द्रग्राम के पटना बीट अंतर्गत नौगवा गांव के राजस्व क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह एक गिद्ध मृत मवेशी के मांस को खाता दिखा जबकि गणना के बाद ग्रामीणों ने मृत मवेशी के पास सात आठ गिद्ध मांस को खाते देखे गये। यह क्षेत्र पड़ोस में वन परिक्षेत्र अनूपपुर के बडहर बीट अंतर्गत जंगल से उड़कर मृत मवेशी के शव को देख कर मांस खाने के उद्देश्य आते रहते हैं।

इस वर्ष की गणना से क्षेत्र में गिद्ध संरक्षण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वनमंडल में 3 प्रजातियों के गिद्ध दर्ज किए गए, जिनमें इंडियन (लान्ग-बिल्ड) गिद्ध, इजिप्शियन (सफेद/व्हाइट स्कैवेंजर) गिद्ध और व्हाइट-रम्प्ड गिद्ध गिद्ध शामिल हैं। इनमें इजिप्शियन गिद्धों की संख्या सर्वाधिक पाई गई। सुबह सूरज की किरणें निकलने के साथ ही गिद्ध सूर्य की रोशनी से अपने शरीर को गर्म करने के लिए घोषलो से निकल कर चट्टानों या पेड़ों में बैठते हैं इसी दौरान ही गिद्धों की गणना का कार्य शुरू हो जाता है जो सुबह 6 बजे से 9 बजे तक चलता है। गणना के सारे आंकड़े एक ऐप के जरिए फोटो खींचकर गणना कर में संलग्न वन कर्मचारियों द्वारा दर्ज की जाती है। अनूपपुर वन परिक्षेत्र में गिद्ध के घोसले ज्यादातर पहाड़ पर और अहिरगवां रेंज में चट्टान एवं पेड़ पर दिखाई दिए हैं। रविवार को प्रथम चरण की गणना कर पूरी हो गई। इसके साथ ही गिद्धों की वास्तविक जानकारी निकलकर सामने आयी। संभावना जताई गई है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष से गिद्ध की संख्या अधिक बढी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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