अनूपपुर: अमरकंटक के शंभूधारा में 7 ध्यान कुटियां में से 3 बदहाली की भेंट चढ़ी

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अनूपपुर: अमरकंटक के शंभूधारा में 7 ध्यान कुटियां में से 3 बदहाली की भेंट चढ़ी


अनूपपुर: अमरकंटक के शंभूधारा में 7 ध्यान कुटियां में से 3 बदहाली की भेंट चढ़ी


अनूपपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मॉ नर्मदा की उद्गग नगरी अमरकंटक के शंभूधारा स्थित आरक्षित वन क्षेत्र में प्रकृति के बीच ध्यान-साधना और मानसिक शांति का अनुभव कराने के उद्देश्य से विकसित की गई 7 में 3 ध्यान कुटियां आज बदहाली की भेंट चढ़ चुकी हैं। जलाशय के किनारे प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित ये कुटियां उचित देखरेख के अभाव में जर्जर होकर धराशायी हो गईं।

मुख्यमंत्री की घोषणा, ईको टूरिज्म बोर्ड ने कराया था निर्माण

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जनवरी 2022 को इस परियोजना की घोषणा की थी। इसके बाद मध्यप्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से शंभूधारा के आरक्षित वन क्षेत्र में 7 ध्यान कुटियों का निर्माण कराया गया। जिसमें 3 ध्यान कुटियों पूरी जर्जर होकर धराशायी हो गईं। इन संरचनाओं को तैयार करने में मिट्टी, पत्थर, बांस, लकड़ी और मोवा घास जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया गया था, ताकि जंगल के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना पर्यटकों और साधकों को शांत वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

परियोजना का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के सान्निध्य में एकांत समय बिताने, योग-ध्यान करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर देना था। लेकिन निर्माण के बाद इन कुटियों की नियमित देखरेख और संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने से इनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

बारिश और उपेक्षा ने उजाड़ दिया प्रकृति के बीच बना ध्यान स्थल

स्थानीय स्तर पर सामने आई स्थिति के अनुसार, बारिश और मौसम की मार के साथ रखरखाव की कमी ने कुटियों को धीरे-धीरे जर्जर कर दिया। समय रहते मरम्मत और संरक्षण के उपाय नहीं किए जाने के कारण प्राकृतिक सामग्रियों से बनी संरचनाएं कमजोर होती गईं और अंततः धराशायी हो गईं।

यह स्थिति केवल कुछ कुटियों के क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए प्रयासों की उपयोगिता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि निर्माण के बाद नियमित निरीक्षण, मरम्मत और संरक्षण की व्यवस्था प्रभावी रहती, तो संभवतः इन संरचनाओं को इस स्थिति तक पहुंचने से बचाया जा सकता था।

वन विभाग की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल

बताया जाता है कि शंभूधारा स्थित इन ध्यान कुटियों की देखरेख की जिम्मेदारी वन विभाग, अमरकंटक की है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इन संरचनाओं का रखरखाव संबंधित विभाग के जिम्मे था, तो समय रहते इनकी मरम्मत और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए?

ध्यान कुटियों की बदहाली को लेकर पहले भी संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद सुधार और संरक्षण की दिशा में प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से विभागीय उदासीनता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

तय हो जवाबदेही, खर्च और रखरखाव का हो आकलन

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि परियोजना के निर्माण पर कितनी राशि खर्च हुई, निर्माण के बाद रखरखाव के लिए क्या व्यवस्था निर्धारित थी, किन अधिकारियों या इकाइयों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी और समय-समय पर संरचनाओं का निरीक्षण किया गया या नहीं।

यदि नियमित रखरखाव के लिए बजट या व्यवस्था उपलब्ध थी, तो उसके उपयोग और निगरानी की भी समीक्षा की जानी चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि ध्यान कुटियों की यह स्थिति प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण बनी या समय पर आवश्यक देखरेख नहीं किए जाने से नुकसान बढ़ा।

पुनरुद्धार से फिर संवर सकता है शंभूधारा

अमरकंटक धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और पर्यावरण आधारित पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। शंभूधारा की ध्यान कुटियां इस क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में संबंधित विभाग को स्थल का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त संरचनाओं का तकनीकी आकलन कराना चाहिए तथा पुनर्निर्माण और नियमित रखरखाव की ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।

प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित इन कुटियों का पुनरुद्धार करते समय पर्यावरणीय संतुलन, वन क्षेत्र के नियमों और स्थानीय प्राकृतिक परिस्थितियों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित निरीक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। संबंधित विभाग शंभूधारा की इन बदहाल ध्यान कुटियों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है, या फिर प्रकृति के बीच विकसित की गई यह परियोजना इसी तरह उपेक्षा का शिकार बनी रहती है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी, अमरकंटक रेंज वीरेंद्र श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि वन विभाग द्वारा पूर्व में इको-फ्रेंडली ध्यान केंद्र बनाया गया था। इसके मरम्मत कार्य के लिए शासन से बजट उपलब्ध नहीं हुआ है। नए ध्यान केंद्र के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

Livevns.news Desk
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