अनूपपुर में ऑनलाइन बिक्री के विरोध में दवा दुकानें रहीं बंद, शांतिपूर्ण तरीके से उठाए मुद्दे

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अनूपपुर में ऑनलाइन बिक्री के विरोध में दवा दुकानें रहीं बंद, शांतिपूर्ण तरीके से उठाए मुद्दे


अनूपपुर में ऑनलाइन बिक्री के विरोध में दवा दुकानें रहीं बंद, शांतिपूर्ण तरीके से उठाए मुद्दे


अनूपपुर, 20 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में बुधवार को दवा विक्रेताओं ने सामूहिक रुप से अपनी दुकानों के शटर बंद रखे। ज‍िला मुख्यालय अनूपपुर, कोतमा, बिजुरी, राजेन्द्रग्राम, बिजुरी, राजनगर, चचाई सहित ग्रमीण क्षेत्रों की 210 दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। केमिस्टों का आरोप है कि ई-फार्मेसी और क्विक कॉमर्स कंपनियों की मनमानी से न सिर्फ उनका व्यापार चौपट हो रहा है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर दिलीप पांडेय से भेंट कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

देश में अवैध एवं अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का गुस्सा फूट पड़ा है। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को दवा व्यवसायियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल रखी। जिसके समर्थन में जिले के सभी छोटे-बड़े दवा दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान पूर्णतः बंद रखकर इस विरोध प्रदर्शन को अपना ऐतिहासिक और सर्वसम्मत समर्थन दिया। सुबह से ही बाजारों में दवा दुकाने बंद होने से लोग दवा के लिए भटकते रहें। दवा संघ के पदाधिकारियों, सदस्यों ने सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को बुलंद करते नजर आए।

मध्य प्रदेश राज्य केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के मार्गदर्शन में अनूपपुर जिले के केमिस्ट और ड्रगिस्ट भी इस आंदोलन में पूरी तरह से शामिल हुए। इस दोरान जिला दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष राजेश जैन, सचिव दीपक सोनी, महेन्द्र गुप्ता, मनोज शुक्ला, सत्य प्रकाश पटेल सहित प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर दिलीप पांडेय से भेंट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में केंद्र सरकार का ध्यान ऑनलाइन दवा व्यापार से उत्पन्न हो रही गंभीर विसंगतियों और नियामकीय खामियों की ओर आकर्षित किया गया। दवा व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो लाखों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। ज्ञापन में मुख्य तीन अत्यंत गंभीर मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया गया।

केमिस्टों ने देश में दवाओं की अवैध और पूरी तरह से अनियमित ऑनलाइन बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना किसी कड़े नियम-कानून के इंटरनेट पर धड़ल्ले से दवाएं बेची जा रही हैं, जो सीधे तौर पर देश की कानून व्यवस्था और स्थापित ड्रग्स एंड केमिस्ट एक्ट का उल्लंघन है। बिना वैध और सत्यापित चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी को लेकर उठाया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चिंता जताई कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी कड़े वेरिफिकेशन के शेड्यूल-एच और अन्य गंभीर दवाएं डिलीवर की जा रही हैं। इससे न केवल दवाओं के दुरुपयोग और नशे की प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ गई है। केमिस्टों ने ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म्स और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट की अनुचित और जनविरोधी नीति का विरोध किया।

केमिस्टों का कहना है कि यह बड़ी कंपनियां भारी फंडिंग के दम पर घाटा सहकर भी भारी छूट दे रही हैं, जिससे पारंपरिक, छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट्स उनके सामने टिक नहीं पा रहे हैं। यह बाजार में एकाधिकार स्थापित करने की एक सोची-समझी साजिश है।

दवा संघ ने सरकार से विशेष रूप से यह मांग की है कि पूर्व में जारी किए गए गजट नोटिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की हैं। केमिस्टों का आरोप है कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और तेजी से उभर रहे क्विक कॉमर्स ऑपरेटर्स इन प्रावधानों का बेजा फायदा उठा रहे हैं। इनकी आड़ में दवाओं की अनियंत्रित और असुरक्षित डिलीवरी को बढ़ावा मिल रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।

केमिस्ट समुदाय ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से आग्रह किया है कि वे देश के लाखों छोटे लाइसेंसधारी केमिस्टों, उनके यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों और करोड़ों मरीजों के व्यापक हितों की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी और सुधारात्मक कदम उठाएं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि हड़ताल के दौरान एसोसिएशन ने पूरी संवेदनशीलता दिखाई।

दवा दुकानदारों ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, जिन्हें किराने के सामान की तरह बिना सोचे-समझे बेचा जाए। उचित तापमान और फार्मासिस्ट के सत्यापन के बिना दवाओं की ऑनलाइन बिक्री जन स्वास्थ्य और मरीजों के जीवन के लिए एक बड़ा खतरा है। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

फार्मास्यूटिकल व्यापार से जुड़े प्रतिनिधियों ने सरकार को उनके पुराने योगदान की याद दिलाते हुए कहा कि जब कोविड-19 महामारी के दौरान पूरा देश घरों में कैद था, तब इन्हीं केमिस्टों ने फ्रंटलाइन हेल्थकेयर सपोर्ट प्रदाताओं के रूप में अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया था। महामारी के दौर में भी देश के कोने-कोने तक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। इसके बावजूद, अवैध ऑनलाइन गतिविधियों के खिलाफ बार-बार साक्ष्य और ज्ञापन देने के बाद भी संबंधित प्राधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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