ग्वालियर: सिंधिया राजघराने का देश में अहम योगदान, रेलवे लाइन के लिए दिये 75 लाख

ग्वालियर: सिंधिया राजघराने का देश में अहम योगदान, रेलवे लाइन के लिए दिये 75 लाख
ग्वालियर: सिंधिया राजघराने का देश में अहम योगदान, रेलवे लाइन के लिए दिये 75 लाख


ग्वालियर, 16 मई (हि.स.)। सिंधिया राज घराने का देश मे अहम योगदान है। राजघराने के महाराजा जिन्होंने न सिर्फ आगरा से ग्वालियर तक रेल लाइन बिछवाई, बल्कि खुद उसे चलाते हुए ले गए, जयाजी राव सिंधिया को अपनी रियासत को आधुनिक बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपनी रियासत में कर संग्रह का एक नया तरीका विकसित किया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया वो आगरा से लेकर ग्वालियर तक रेलवे लाइन का निर्माण था।

सिंधिया राजघराना अपने शहर ग्वालियर के लिए एक खास स्थान रखता है। क्योंकि इस परिवार ने शहरवासियों समेत प्रदेश को कई सौगातें भी दी हैं। इन सौगातों से सिंधिया राजघराने के अलग अलग महाराजों का ताल्लुक रहा है। इस राजघराने के ऐसे ही एक महाराज गुजरे हैं जयाजी राव सिंधिया। जयाजी राव को अपनी रियासत के आधुनिकीकरण के लिए आज भी पहचाना जाता है।

सिंधिया राज घराने के महाराजा जयाजी राव सिंधिया का जन्म 19 जनवरी 1835 को हुआ था। जयाजी राव को आज भी अपनी रियासत को आधुनिक बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपनी रियासत में कर संग्रह का एक नया तरीका विकसित किया था। साथ ही अपनी रियासत में अदालत की स्थापना की थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया, वह था आगरा से लेकर ग्वालियर तक रेलवे लाइन का निर्माण। मिली जानकारी के अनुसार, जयाजी राव सिंधिया ने आगरा से ग्वालियर के बीच रेलवे लाइन के निर्माण के लिए साल 1872 में 75 लाख रुपए दिए थे, जो उस समय की अकल्पनीय रकम थी। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई अपनी किताब हाउस ऑफ़ सिंधिया में लिखते हैं कि जयाजी राव सिंधिया बहुत प्रगतिशील शासक गुजरे हैं। उन्होंने साल 1872 में आगरा से लेकर ग्वालियर तक और फिर ग्वालियर से शिवपुरी तक की रेलवे लाइन बिछवाई थी। इसका व्यय उन्हींनें वहन किया था।

खुद चलाकर ले गए थे ट्रेन

यही नहीं, जब रेलवे लाइन बनकर पूरी तरह तैयार हो गई तो महाराजा जयाजीराव खुद ग्वालियर से शशेरा तक करीब 18 किलोमीटर स्टीम इंजन चलाकर ले गए थे। जयाजी राव सिंधिया ही वो श ़स थे, जिन्होंने जय विलास पैलेस का निर्माण करवाया, जिसे आज भी भारत के सबसे आलीशान महलों में से एक माना जाता है। रशीद किदवई लिखते हैं कि उस जमाने में सिंधिया ने कर्नल सर माइकल फेलोस से जय विलास पैलेस का डिजाइन बनवाया था। माइकल फेलोस उस दौर के नामी

अकूत-दौलत के मालिक

जय विलास पैलेस का सबसे आकर्षक हिस्सा दरबार हाल है, जो साल 1874 में बनकर तैयार हुआ और इसकी मजबूती जांचने के लिए जयाजी राव ने महल की छत पर हाथी चढ़वा दिए थे। रशीद किदवई की किताब के अनुसार, महाराजा जयाजीराव सिंधिया के पास अकूत-धन दौलत थी और उन्हें अपना खजाना जगह-जगह छुपाने की आदत थी। ग्वालियर किले के अंदर कई ऐसे सीक्रेट चैंबर थे, जिसमें उन्होंने अपना खजाना छुपाया हुआ था। यह सीक्रेट चैंबर एक खास कोड से खुलते थे, जिसे बीजक कहा जाता था।

आज भी नहीं मिल सका किसी को वो खजाना

जयाजी राव के बेटे माधो महाराज से गलती से बीजक कहीं खो गया। इसके बाद उन्होंने खजाना ढूंढने के लिए पूरी जान लगा दी। माधो राव ने अंग्रेज अफसर कर्नल बैनरमैन की मदद ली। बैनरमैन ने ग्वालियर के किले से 6.2 करोड़ रुपये कीमत के सोने के सिक्के ढूंढ निकाले। कहा ये भी जाता है कि ये जयाजी राव द्वारा खिपाए गए खजाने का महज छोटा सा हिस्सा था। पूरा खजाना आज तक नहीं मिल पाया है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेद्र/मुकेश

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