जल स्रोत सहेजने के काम में लगे समाजसेवियों को करें सम्मानितः मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जल स्रोत सहेजने के काम में लगे समाजसेवियों को करें सम्मानितः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जल स्रोत सहेजने के काम में लगे समाजसेवियों को करें सम्मानितः मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- मुख्यमंत्री ने वीसी से की जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल, 12 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में आगे बढ़कर हिस्सेदारी करने वाले समाजसेवियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अन्य लोग भी ऐसे कार्यों के लिए प्रेरित हों। ऐसे लोगों को सम्मानित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए ऐसे स्थान का भी चयन करें, जहां पर्यटन विकास हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों का सहयोग प्राप्त किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को अपने निवास कार्यालय समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा सांसद, विधायक, मंत्रीगण, जिलों में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने इस मौके पर प्रदेश में पांच से 16 जून तक संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियों की समीक्षा की। नगरीय विकास एवं आवास और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव वीरा राणा और अधिकारीगण वीडियो कांफ्रेंस में उपस्थित थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी विभिन्न स्थानों से वीडियो कांफ्रेंस में शामिल हुए।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में विभिन्न जिलों में जल गंगा संवर्धन अभियान से जुड़े कार्यों की जानकारी दी गई। विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून से प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान का औपचारिक समापन 16 जून को होगा। इसके पश्चात भी जल संरक्षण गतिविधियां निरंतर जारी रहेंगी। विभिन्न जिलों में जल संरक्षण से जुड़े अभिनव कार्य हो रहे हैं। कुछ जिलों ने नवाचार भी किए हैं, जिनकी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशंसा की। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पन्न कार्यों की विस्तृत जानकारी अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव और नगरीय क्षेत्रों में हुए कार्यों का विवरण प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गत छह माह में जनकल्याण के अनेक फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करेगा। हम विकास की नई इबारत लिखेंगे। विकास की प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को भी शामिल होकर बेहतर परिणाम लाने में सहयोग करना है।

जिलों में सम्पन्न गतिविधियाँ : एक नजर में

गत 5 जून से प्रदेश में प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत मंडला जिले में जिले की आबादी के बराबर 11.5 लाख पौधे रोपने की पहल की गई है। मनरेगा के अंतर्गत जो 5 हजार कार्य चल रहे हैं, उनमें लगभग एक हजार ऐसे कार्य चिन्हित किए गए हैं जो जल संरक्षण से जुड़े हैं। करीब 500 चेकडेम वन विभाग की ओर से निर्मित हो रहे, जिनकी लागत डेढ़ करोड़ रूपए है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर में तालाबों के पास पूजन सामग्री आदि के विसर्जन के लिए अलग स्थान बनाया गया है। उन्होंने कहा कि गढ़ा एवं अन्य क्षेत्र का मैंने सोमवार को निरीक्षण भी किया। वीरांगना रानी दुर्गावती के इस क्षेत्र में जल संरक्षण का बेहतर कार्य हो रहा है। यह कार्य सराहनीय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे दानदाताओं की जानकारी भी सामने आना चाहिए। सागर जिले के मकरोनिया क्षेत्र में महाविद्यालय के लिए ढाई करोड़ रुपए का गुप्त दान देने वाले सज्जन को भी सम्मानित किया जाए। जल संरक्षण और निजी भूमि पर दो एकड़ क्षेत्र में सरोवर के लिए भूमि प्रदान करने वाले व्यक्ति भी सम्मानित किए जाएं। सागर जिले में सागर नगर के सरोवर के सौन्दर्यीकरण और अन्य कार्यों की जानकारी दी गई।

बुरहानपुर जिले में जल संरक्षण के लिए अच्छा कार्य हो रहा है। ताप्ती घाट की सफाई हुई है। कुओं पर बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्ड्स पर लिखा है मुझे संभालो मैं आपको संभाल लूंगा। पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने बताया कि करीब 5 हजार मकानों की छत पर वर्षाकाल में एकत्र होने वाले जल को जमीन में उतारने का प्रस्ताव है। ऐसे घरों पर जल मंदिर का लोगो लगाया जाएगा। जिले में 104 अमृत सरोवरों के नामकरण और उनके पालक निर्धारित करने का कार्य भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों और बुरहानपुर जिले के अधिकारियों को इन कार्यों के लिए बधाई दी।

इंदौर में सभी 85 वार्ड में एक-एक जल संरचना के जीर्णोद्धार का फैसला लिया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि नदियों के उद्गम स्थल को विकसित और प्रचारित करने का कार्य भी शुरू हुआ है। इसी तरह बावड़ियों में वर्षा जल पहुंचाने, इन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नदियों से जुड़े उद्गम स्थलों और निकटवर्ती अंचल के इतिहास को प्रचारित करने के निर्देश दिए।

खरगोन जिले में शाला भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य और आम जनता को गाद ले जाने की सुविधा देने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गतिविधियां सराहनीय हैं।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि जल स्त्रोतों के किनारे पौधे लगाने और नदियों के उद्गम स्थल की जानकारियां सामने लाने एवं जल संरक्षण के लिए जनता को जागरूक बनाने के कार्य किए जा रहे हैं। पटेल ने बताया कि उन्होंने रायसेन एवं अन्य जिलों में पलकमती, धसान, बेबस और बीना नदियों के उद्गम स्थलों का निरीक्षण किया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में बताया कि उज्जैन में मई माह से ही तालाबों के गहरीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। नदियों के घाटों की साफ-सफाई की जा रही है। करीब 400 चेकडेम बनाए जा रहे हैं। गीता कॉलोनी की बावड़ी और गोवर्धन सागर से जुड़े जल संरक्षण कार्यों को शीघ्र क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने तराना में देवी अहिल्या द्वारा निर्मित करवाई गई प्राचीन अहिल्या बावड़ी के जीर्णोद्धार के भी निर्देश दिए। वीसी में उद्यानिकी विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि प्रदेश में विभिन्न प्रजातियों के साढ़े चार लाख पौधे लगाने की तैयारी की गई है। पोर्टल पर पंजीयन कार्य भी किया जा रहा है। कुल 2250 एकड़ क्षेत्र में 2200 कृषकों की भागीदारी से उद्यानिकी गतिविधियां होंगी। जुलाई और अगस्त माह में पौधरोपण का यह कार्य किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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