गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हमारा ध्येय, केवल नैक ग्रेड प्राप्त करना उद्देश्य नहीं : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

WhatsApp Channel Join Now
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हमारा ध्येय, केवल नैक ग्रेड प्राप्त करना उद्देश्य नहीं : उच्च शिक्षा मंत्री परमार


- 341 संस्थानों के आईक्यूएसी समन्वयकों का प्रशिक्षण प्रारंभ

भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत की सशक्त आधारशिला है। हमारा उद्देश्य केवल राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की ग्रेड प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक, नवाचार आधारित एवं मूल्यपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षण संस्थान गुणवत्ता के सर्वोच्च मानकों पर खरे उतरेंगे, तभी मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

मंत्री परमार बुधवार को राजधानी भोपाल में राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रकोष्ठ के शुभारंभ, उसके आधिकारिक प्रतीक चिन्ह (लोगो) के अनावरण तथा आईक्यूएसी समन्वयकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता संवर्धन, संस्थागत उत्कृष्टता तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मानकों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसएएसी का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग तथा सतत परामर्श उपलब्ध कराएगा। इससे संस्थान राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप अपनी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बना सकेंगे।

परमार ने कहा कि प्रदेश के 341 शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के आईक्यूएसी समन्वयकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से गुणवत्ता मानकों, दस्तावेजीकरण, संस्थागत सुधार तथा प्रत्यायन प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। यह प्रशिक्षण केवल प्रक्रिया संबंधी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि महाविद्यालयों में गुणवत्ता आधारित कार्य संस्कृति विकसित करने का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को केवल NAAC प्रत्यायन तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। परमार ने कहा कि एसएएसी के माध्यम से प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के साथ सार्वजनिक एवं निजी विश्वविद्यालयों को भी गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। यह पहल मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगी।

परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, अनुसंधान एवं कौशल विकास को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए महाविद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति हेतु लगातार भर्ती की जा रही है तथा विश्वविद्यालयों में भी शीघ्र रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, परीक्षा और परिणाम सुनिश्चित कर शैक्षणिक कैलेंडर का अनुपालन करना हमारी प्राथमिकता है। समय पर प्रवेश, नियमित कक्षाएं, समयबद्ध परीक्षाएं, पारदर्शी एवं त्वरित मूल्यांकन तथा समय पर परिणाम घोषित करना सभी संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी है। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय एवं गोपनीय बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राध्यापकों की उपस्थिति सार्थक ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है तथा इसी व्यवस्था के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नैक केवल ग्रेड प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि किसी भी संस्थान की गुणवत्ता, कार्यसंस्कृति, नवाचार, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व का समग्र मूल्यांकन करती है इसलिए प्रत्येक महाविद्यालय में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ किया जाए, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो तथा परिसर में सकारात्मक, अनुशासित एवं अकादमिक वातावरण विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में पुस्तकालय, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल मैदान, हरित एवं स्वच्छ परिसर, अनुसंधान, नवाचार, इंटर्नशिप, उद्योगों के साथ समन्वय, डिजिटल शिक्षण, विद्यार्थी सहभागिता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को संस्थागत संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। उत्कृष्ट परिसर, सक्रिय अकादमिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण ही किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान होते हैं।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल नवाचार, अनुसंधान एवं कौशल विकास के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एसएएसी को नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने तथा महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के साथ-साथ QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों के गुणवत्ता संवर्धन के लिए सभी की सहभागिता, आत्ममंथन एवं निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। विद्यार्थी हितों को केंद्र में रखकर किए गए प्रयास ही एसएएसी की अवधारणा को सफल बनाएंगे।

आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने स्वागत उद्बोधन में एसएएसी की स्थापना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा राज्य के समग्र विकास की आधारशिला है। एसएएसी संस्थानों में गुणवत्ता, नवाचार, अनुसंधान, सुशासन एवं सतत सुधार की संस्कृति विकसित करने का प्रभावी मंच सिद्ध होगा।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यांकन एवं प्रत्यायन प्रक्रिया, आईक्यूएसी की भूमिका, दस्तावेजीकरण, संस्थागत श्रेष्ठ प्रथाओं तथा राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम में अतिरिक्त संचालक मथुरा प्रसाद, एसएएसी की सदस्य सचिव एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. उषा के. नायर, विषय विशेषज्ञ, शिक्षाविद, प्राचार्य तथा प्रदेशभर से आए आईक्यूएसी समन्वयक उपस्थित थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

Share this story