एमपीपीएससी की भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख

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एमपीपीएससी की भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख


जबलपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। मप्र उच्च न्यायालय ने एमपीपीएससी की सहायक संचालक भर्ती में कम अंक वाले का चयन और ज्यादा अंक वाले को वेटिंग में डालने पर कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले पर उच्च न्यायालय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। बालाघाट निवासी नितिन कुमार मेश्राम की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है।

याचिका में बताया गया कि लोक सेवा आयोग द्वारा 31 मई 2023 को जारी विज्ञापन के तहत सहायक संचालक तकनीकी पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरु की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता अनुसूचित जाति वर्ग से शामिल हुआ था। 6 दिसंबर 2025 को जारी परिणाम में न तो उसका नाम था और न ही अंक घोषित किए गए। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को जारी चयन सूची में अनुसूचित जाति वर्ग से लखन सिंह दौहरे 53 अंक को चयनित दिखाया गया। याचिकाकर्ता को उससे अधिक अंक होने के बावजूद अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में क्रमांक दो पर रखा गया। याचिकाकर्ता ने आरक्षण नियमों का उल्लंघन होने का आरोप लगाया। कोर्ट को बताया गया कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 335 के साथ-साथ मध्य प्रदेश आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 4(4) के भी खिलाफ है।

दलील दी गई कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिक अंक वाले अभ्यर्थी को अनारक्षित प्रतीक्षा सूची में डालना और कम अंक वाले को चयन देना पूरी तरह असंवैधानिक है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश शासन, लोक सेवा आयोग और चयनित अभ्यर्थी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि सहायक संचालक पदों पर की गई समस्त नियुक्तियां अब इस याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और अधिवक्ता पुष्पेंद्र शाह ने कोर्ट में पैरवी की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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