जबलपुरः गवाह पलटते ही विस्फोटक केस के मामले में हाईकोर्ट से मिली जमानत
जबलपुर, 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह विस्फोटक केस मामले में गवाह के पलटते ही 8 महीने बाद उच्च न्यायालय से आरोपी कैलाश ठाकुर को जमानत मिल गयी है। इसके साथ ही पुलिस के तमाम दावे झूठे साबित हुये।
दमोह निवासी कैलाश सिंह ठाकुर को पुलिस ने अरबाज खान और मोनू रैकवार के साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4/5 के तहत गिरफ्तार किया था। निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक कैलाश की दो जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं। नवंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दाखिल जमानत याचिका पर शीतकालीन अवकाश के कारण सुनवाई टलती रही।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने पूरी केस फाइल खंगालने के बाद तीसरी बार जमानत याचिका दायर की गई। इस तीसरी जमानत याचिका पर मंगलवार को मुख्य पीठ जबलपुर में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल के समक्ष सुनवाई हुई। जिसमें सभी तथ्य सामने रखे गए। ठोस तर्कों और रिकॉर्ड पर आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने कैलाश को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।
कोर्ट में गवाही के दौरान सरफराज ने साफ कह दिया कि उसने किसी प्रकार की बरामदगी नहीं देखी। पुलिस की कोई कार्रवाई उसके सामने नहीं हुई वह आरोपियों को पहचानता तक नहीं है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने लंबी जेल अवधि और गवाह के बयान को आधार बनाकर कैलाश को जमानत का आदेश दिया। इस सम्पूर्ण मामले में अधिवक्ता विवेक तिवारी के साथ अधिवक्ता निशांत मिश्रा और मोहसिन खान ने पैरवी की।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

