एमपी में खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिका खारिज

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एमपी में खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिका खारिज


जबलपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था ई-विकास (डिस्ट्रीब्यूशन एंड एग्रीकल्चर फर्टिलाइजर सप्लाई सॉल्यूशन सिस्टम) को वैध ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है।

मंगलवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू की गई यह व्यवस्था केंद्र सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायालय केवल सीमित परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप कर सकता है।

कृषि आदान विक्रेता संघ की ओर से दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण खाद वितरण में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-टोकन प्रणाली लागू होने से तकनीकी जानकारी और इंटरनेट की कमी वाले किसानों को कठिनाई हो रही है। साथ ही, इस व्यवस्था को उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के विपरीत बताया गया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पुरानी व्यवस्था में खेती नहीं करने वाले लोग भी सब्सिडी वाली खाद खरीदकर उसकी कालाबाजारी करते थे या गैर-कृषि कार्यों में उसका उपयोग करते थे। सरकार के अनुसार, ई-विकास प्रणाली के तहत अब किसानों को उनकी भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी। वहीं, बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान एसडीएम से सत्यापन कराने के बाद ई-टोकन के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकते हैं।

गौरतलब है कि 10 मार्च 2026 की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अपने अंतिम आदेश में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-विकास प्रणाली के क्लॉज 18.9 के तहत यदि किसी जिले में इंटरनेट या अन्य तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित जिला कलेक्टर परिस्थितियों के अनुसार अस्थायी रूप से पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने का निर्णय ले सकते हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता अमन गुप्ता ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली तथा केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने पैरवी की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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