नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामला: अनसूटेबल कॉलेजों के 2935 छात्रों को राहत ,आगामी परीक्षा में होंगे शामिल
जबलपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े से संबंधित लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय, जबलपुर के जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिविजन बेंच ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए अनसुटेबल कॉलेजों के जीएनएम पाठ्यक्रम के 2935 को राहत दी है ।
मामले में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने नर्सिंग काउंसिल की ओर से हाईकोर्ट में जानकारी पेश कर बताया कि अनसूटेबल कॉलेजो से सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर हेतु पात्र पाये गए कुल पंजीकृत छात्र 4,475 हैं जिनमे से शिफ्टिंग हेतु पंजीकृत छात्रों की संख्या 2,813 है एवं चॉइस फिलिंग करने वाले छात्र 2,619 थे जिनमे से 2,395 छात्र सफलतापूर्वक स्थानांतरित किए जा चुके हैं, हाईकोर्ट ने उक्त जानकारी को रिकार्ड पर लेते हुए इन सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल करने तथा रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं ।
हाईकोर्ट में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों ने आवेदन पेश कर बताया कि उनके कॉलेजों की जांच पूर्व में 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति द्वारा की जा चुकी है जिसमें उन्हें उपयुक्त पाया गया था इसी आधार पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उन कॉलेजों की सीबीआइ जांच पर अस्थाई रूप से रोक लगाई थी उक्त आधार पर कॉलेजों के छात्रों द्वारा हाई कोर्ट से मांग की गई कि उनके कॉलेजों की जांच पर वर्तमान में रोक होने के कारण उनके सूटेबल कॉलेज मान्य किए जाकर पूर्व वर्ष की भांति इस वर्ष भी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए तथा उनके परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं ।
मामले में याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ग्वालियर चंबल के इन कॉलेजों की जांच जिस 10 सदस्यीय दल द्वारा की गई थी उनके द्वारा फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हुई की गई थी, जबकि ग्वालियर चंबल संभाग के कॉलेजों के द्वारा उक्त सत्रों में अनेकों फर्जी एवं डुप्लीकेट फैकल्टी दर्शा कर मान्यता प्राप्त की गई थी, जिसे जबलपुर बेंच में लंबित नर्सिंग फर्जीवाड़े मामले में भी हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया गया था इस कारण से उन कॉलेजों को सीबीआइ जांच के बगैर कोई भी राहत नहीं दी जानी चाहिए, हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद उन कॉलेजों के संबंध में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया । युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वही कॉलेज संचालन और परीक्षा के अधिकारी होंगे जो जांच के बाद सुटेबल घोषित हैं, हालांकि हाईकोर्ट ने आवेदनकर्ताओं को स्वतंत्रता दी है कि वे चाहें तो सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण में आवेदन पेश कर सकते हैं ।
गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में मध्य प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी जिसमें हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए थे, इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पायी गई थी । कई कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे थे और कई प्रिंसिपल और शिक्षक 15-15 कॉलेजों में एक साथ कार्यरत दर्शाए गए थे । मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के चलते नर्सिंग कॉलेजों की संख्या घट कर लगभग 200 रह गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

