प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में अपात्रों को 'बोनस अंक' व विवादित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट का फैसला

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प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में अपात्रों को 'बोनस अंक' व विवादित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट का फैसला


जबलपुर, 13 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से 5% बोनस अंक दिए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका में जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने बुधवार को फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने 13089 चयनित प्राथमिक शिक्षको को बड़ा झटका देते हुए नए सिरे से मेरिट सूची बनाने और ग़ैर-आरसीआई डिप्लोमा धारी अपात्र अभ्यर्थियों को उनकी अभ्यर्थिता समाप्त कर चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि यदि उम्मीदवारों को पकड़े जाने के बाद अपने अंकों को कम करने या 'नहीं' का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती है, तो यह बेईमानी को बढ़ावा देने और ईमानदार उम्मीदवारों को दंडित करने के समान होगा।

नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो उम्मीदवारों के द्वारा याचिका दाखिल कर कहा गया था कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5% बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास 'भारतीय पुनर्वास परिषद' (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। लेकिन, चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं।

याचिका में 'भारतीय पुनर्वास परिषद' के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूरे मध्य प्रदेश में RCI पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं । ऐसे में लगभग 15,000 उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है । याचिका के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने 'हाँ' का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है । इसके बावजूद, सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से RCI पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया।

परिणाम स्वरूप, बिना किसी भौतिक सत्यापन के सॉफ्टवेयर के माध्यम से उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार सीधे बोनस अंक दे दिए गए, जिससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट गिर गई और वे चयन से बाहर हो गए , कोर्ट में दलील दी गई थी कि झूंठी जानकारी देकर चयन होने के बाद सैकड़ों अभ्यर्थी जिन्हें मेरिट में 5% बोनस अंक मिले हैं वे भी हाइकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं और मांग की है कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उनके द्वारा बोनस अंक का लाभ प्राप्त कर लिया जबकि उनके पास उससे संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र नहीं है, उनकी याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज की है।

याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग की गई थी तथा केवल वैध RCI प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया था । बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई के बाद एकलपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था जिसके बाद 13 मई को फैसला सामने आया । याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की ।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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