मप्रः विवादित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित

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मप्रः विवादित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले मामले में हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित


जबलपुर, 06 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से 5% बोनस अंक दिए जाने के खिलाफ लंबित याचिका पर उच्च न्यायालय, जबलपुर में जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष बुधवार को अंतिम सुनवाई हुई, सुनवाई के बाद एकलपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है।

याचिकर्ताओं के वकील विशाल बघेल ने बताया कि नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो उम्मीदवारों द्वारा याचिका दाखिल की है याचिका में कहा गया कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5% बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास 'भारतीय पुनर्वास परिषद' (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है । हालांकि, चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं ।

याचिका में 'भारतीय पुनर्वास परिषद' के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूरे मध्य प्रदेश में पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं । ऐसे में लगभग 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है।

याचिका के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18,000 उम्मीदवारों ने 'हाँ' का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है । इसके बावजूद, सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से RCI पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया।

परिणाम स्वरूप, बिना किसी भौतिक सत्यापन के सॉफ्टवेयर के माध्यम से उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार सीधे बोनस अंक दे दिए गए, जिससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट गिर गई और वे चयन से बाहर हो गए , कोर्ट में दलील दी गई कि झूंठी जानकारी देकर चयन होने के बाद सैकड़ों अभ्यर्थी जिन्हें मेरिट में 5% बोनस अंक मिले हैं वे भी हाइकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं और मांग की है कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उनके द्वारा बोनस अंक का लाभ प्राप्त कर लिया जबकि उनके पास उससे संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र नहीं है , उनकी याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज की है।

याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग की गई है तथा केवल वैध RCI प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है । बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई के बाद एकलपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है । याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की ।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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