हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार , स्कूलों का ‘मोनोपॉली सिंडिकेट हुआ उजागर

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हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार , स्कूलों का ‘मोनोपॉली सिंडिकेट हुआ उजागर


जबलपुर, 07 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने स्कूलों द्वारा कथित रूप से संचालित मोनोपॉली सिंडिकेट के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। सोमवार आये आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला गंभीर आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है और प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, इसलिए एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने इस प्रकरण में दाखिल कुल 13 याचिकाएं खारिज कर दीं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल प्रबंधन, बुक सेलर्स और प्रकाशकों के बीच मिलीभगत के आरोप गंभीर हैं और इनका परीक्षण ट्रायल में होना आवश्यक है। यह फैसला निजी स्कूलों द्वारा फीस और किताबों के नाम पर की जा रही कथित मनमानी पर बड़ा संदेश माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने माना कि स्कूलों, बुकसेलर्स और पब्लिशर्स के बीच एक संगठित मोनोपोलिस्टिक सप्लाई चेन बनाई गई थी। अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगी किताबें खरीदवाई गईं, जिससे अवैध और अत्यधिक मुनाफा कमाया गया। अदालत ने इसे केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का संकेत बताया।

करीब दो वर्ष पूर्व जबलपुर जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ओमती, बेलबाग, संजीवनी नगर, ग्वारीघाट और गोराबाजार थानों में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह कार्रवाई तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर की गई थी। जिनमें निम्नांकित आरोप रहे।

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निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूली

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डुप्लीकेट ISBN (International Standard Book Number) वाली किताबों की बिक्री

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अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य करना

मामले में जबलपुर और कटनी के कई मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें अतुल अनुपम इब्राहम, लवी मैथ्यू, एकता पीटर्स, चंद्रशेखर विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल) के अलावा चिल्ड्रन्स बुक हाउस के संचालक सूर्यप्रकाश वर्मा और शशांक श्रीवास्तव के नाम भी सामने आए हैं।

हालांकि आरोपियों को पूर्व में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन एफआईआर रद्द कराने की उनकी मांग को अदालत ने खारिज कर दिया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल ने कार्रवाई को वैध ठहराया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इस फैसले को शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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