नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण को दी गई चुनौती, हाईकोर्ट ने पूछा - लिंग आधारित भेदभाव क्यों ?
जबलपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली 800 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। बुधवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ ने सरकार एवं ईएसबी से पूछा है कि नर्सिंग ऑफिसर के पदों में महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण किस आधार पर दिया जा रहा है, मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
दरअसल संतोष कुमार लोधी एवं अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 2 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100% केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है । इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं । याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 'मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023' के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है ।
मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान वैधानिक नियमों के विपरीत है याचिका में तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (B.Sc. नर्सिंग/GNM) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है । केवल लिंग के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है । याचिका में मांग की गई है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100% पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

