नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में अब भर्ती नियमों की संवैधानिकता को चुनौती, हाईकोर्ट ने विभाग से माँगा जबाब ,

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नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में अब भर्ती नियमों की संवैधानिकता को चुनौती, हाईकोर्ट ने विभाग से माँगा जबाब ,


जबलपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने गुरुवार को नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती को लेकर प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है।

गौरतलब है कि प्रदेश में हो रही नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर रखने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता विनोद सनोडिया और एक अन्य उम्मीदवार द्वारा याचिका में 2 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन और विभाग के भर्ती नियम के किए गए संशोधनो को असंवैधानिक बताया गया है । याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि विज्ञापन में नर्सिंग ऑफिसर के सभी 1,256 पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं । यह मध्य प्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष प्रावधान) नियम, 1997 का उल्लंघन है, जो महिलाओं के लिए अधिकतम 35% क्षैतिज आरक्षण की अनुमति देता है।

याचिका में कहा गया है कि पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत प्राप्त समानता के मौलिक अधिकारों का हनन है । याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवार एक ही संस्थानों में, एक ही पाठ्यक्रम और परीक्षा के माध्यम से नर्सिंग की प्राप्त करते हैं । इसके बावजूद केवल लिंग के आधार पर उन्हें सार्वजनिक रोजगार से वंचित करना अतार्किक और भेदभावपूर्ण है।

याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश नर्स, मिडवाइव्स, सहायक नर्स-मिडवाइव्स और स्वास्थ्य आगंतुक पंजीकरण अधिनियम, 1972 के तहत नर्स शब्द में पुरुष नर्स भी शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि यह पेशा कानूनन लिंग-तटस्थ है । याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2010 में भी इसी तरह के भेदभावपूर्ण विज्ञापन को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, जिसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने भी की थी।

इसके बावजूद सरकार द्वारा बार-बार नियमों में संशोधन कर पुरुष उम्मीदवारों के अवसरों को सीमित किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल पैरवी कर रहे हैं । याचिका में मांग की गई है कि नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में पुरुष उम्मीदवारों को भी समान अवसर प्रदान किए जाएं और भेदभावपूर्ण नियमों को असंवैधानिक घोषित किया जाए।

मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को 23 अप्रैल तक जबाब देने के निर्देश दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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