मप्रः हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में शिवराज, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह को दी राहत, जमानती वारंट पर लगाई रोक

मप्रः हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में शिवराज, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह को दी राहत, जमानती वारंट पर लगाई रोक
मप्रः हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में शिवराज, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह को दी राहत, जमानती वारंट पर लगाई रोक


जबलपुर, 4 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता विवेक तन्खा के मानहानि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को बड़ी राहत दी है। अंडरटेकिंग देने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ दो दिन पहले जमानती वारंट जारी हुए थे। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने गुरुवार को भाजपा के तीनों वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा कि शिवराज और वीडी शर्मा इस समय लोकसभा चुनावों में प्रत्याशी हैं। इस आधार पर उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के दो अप्रैल के फैसले पर रोक लगाई जाती है। इस संबंध में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी। तब तक भाजपा के तीनों नेताओं के खिलाफ कोई वारंट जारी नहीं होगा।

यह है मामला

गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ 10 करोड़ की मानहानि का परिवाद दायर किया था। परिवाद में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर उन्होंने कोई बात नहीं कही थी। उन्होंने मध्य प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव मामले में परिसीमन और रोटेशन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी तो भाजपा नेताओं ने साजिश करते हुए इसे गलत ढंग से पेश किया। भाजपा नेताओं ने गलत बयान देकर ओबीसी आरक्षण पर रोक का ठीकरा उनके सिर फोड़ दिया। इससे उनकी छवि धूमिल करके आपराधिक मानहानि की है।

इस मामले में विशेष न्यायिक न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) विश्वेश्वरी मिश्रा ने 20 जनवरी को तीनों के विरुद्ध मानहानि का प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने तीनों नेताओं को 22 मार्च को मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित के निर्देश दिए थे। निर्धारित तारीख को तीनों नेताओं की तरफ से गैर-हाजिरी माफी आवेदन प्रस्तुत किया था। स्वयं को लोकसभा चुनाव में व्यस्त बताते हुए आग्रह किया था कि उन्हें सात जून तक का समय प्रदान किया जाए। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार किया था। साथ ही कहा था कि तीनों नेता दो अप्रैल को स्वयं उपस्थित होकर इस संबंध में अंडरटेकिंग प्रस्तुत करें, लेकिन चुनावी व्यस्तता के कारण दो अप्रैल को भी तीनों नेता कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। विशेष न्यायिक न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) विश्वेश्वरी मिश्रा की कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए सात मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश जारी किया था।

शिवराज सिंह चौहान विदिशा से और विष्णुदत्त शर्मा खजुराहो से भाजपा के प्रत्याशी हैं। विदिशा में तो सात मई को ही मतदान होना है। इस लिहाज से दोनों का व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर अंडरटेकिंग देना थोड़ा मुश्किल है। तीनों नेताओं ने हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि प्रकरण की सुनवाई के दौरान उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान की जाए। गुरुवार को जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान वकीलों की यह दलील कोर्ट ने स्वीकार की और फिलहाल वारंट जारी करने पर रोक लगाई है। याचिका की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश/नेहा

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