मप्र उच्च न्यायालय पहुंचा गौरझामर देव दत्तात्रेय लोक न्यास का मामला, कलेक्टर और एसडीएम के खिलाफ अवमानना याचिका दायर

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मप्र उच्च न्यायालय पहुंचा गौरझामर देव दत्तात्रेय लोक न्यास का मामला, कलेक्टर और एसडीएम के खिलाफ अवमानना याचिका दायर


सागर, 18 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के गौरझामर में स्थित ऐतिहासिक देव दत्तात्रेय लोक न्यास की संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे और प्रशासनिक निष्क्रियता का मामला अब कानूनी गलियारों में गर्मा गया है। ट्रस्ट की बेशकीमती भूमि पर भू-माफियाओं के अतिक्रमण और जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज होकर न्यास के चार ट्रस्टियों ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। ट्रस्टियों ने सागर कलेक्टर, देवरी एसडीएम और स्थानीय तहसीलदार के खिलाफ कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।

न्यास के ट्रस्टियों का आरोप है कि भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों ने ट्रस्ट की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा कर रखा है। याचिका में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी कर ट्रस्ट की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर बिना किसी सक्षम अनुमति के ट्रस्ट की भूमि पर एक आलीशान शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण करा दिया गया। ट्रस्टियों का कहना है कि यह सीधे तौर पर न्यायालय के निर्देशों का खुला उल्लंघन और अवमानना है।

इस पूरे विवाद की जड़ें काफी गहरी हैं। मामले के अनुसार, तत्कालीन एसडीएम स्तर पर नियमों को दरकिनार करते हुए ट्रस्ट रजिस्टर से चार ट्रस्टियों के नाम हटा दिए गए थे। इस मनमानी कार्रवाई के खिलाफ ट्रस्टी अदालत गए, जहां हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रशासनिक आदेश को अवैध घोषित कर दिया था। बाद में इस फैसले को सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने भी सही ठहराया और उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय पर अपनी मुहर लगाई थी। ट्रस्टियों का कहना है कि देश की सर्वोच्च अदालत से न्याय मिलने के बावजूद स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं किया गया।

प्रशासन की इस कथित अनदेखी से क्षुब्ध होकर ट्रस्टियों ने उच्‍च न्‍यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में निम्न अधिकारियों को प्रतिवादी बनाते हुए न्यायालय अवमानना अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है, प्रतिभा पाल (सागर कलेक्टर), मुनब्बर खान (देवरी एसडीएम), प्रीति चौरसिया (तहसीलदार)

याचिका में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ट्रस्टियों ने उल्लेख किया है कि एक तरफ जहाँ ट्रस्ट की भूमि पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण और अतिक्रमण चल रहा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन ने मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं को परेशान करने के लिए उनके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर दी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए ट्रस्टियों ने 'रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट' से वर्ष 2001 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक की अवधि का पूरा आय-व्यय का विवरण भी मांगा है।

इस संवेदनशील मामले में उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं की ओर से आरपीएस लॉ एसोसिएट्स के अधिवक्ता यशवंत सिंह लोधी, अभिलाषा सिंह और काजल विश्वकर्मा पैरवी कर रहे हैं। लीगल टीम का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का पालन किया होता और भूमि का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया होता, तो ट्रस्टियों को दोबारा अदालत की शरण में आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

अब देखना यह होगा कि इस हाई-प्रोफाइल अवमानना याचिका पर मध्य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय सागर जिला प्रशासन को क्या कड़े निर्देश जारी करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

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