हरदा में खाद के लिए किसान परेशान, चार बोरी पर हजारों का अतिरिक्त खर्च

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हरदा में खाद के लिए किसान परेशान, चार बोरी पर हजारों का अतिरिक्त खर्च


हरदा, 25 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में खाद वितरण की नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन व्यवस्था और सीमित स्टॉक के चलते उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद पाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। हालत यह है कि दो से चार बोरी यूरिया, डीएपी या सुपर खाद लेने के लिए किसानों को हजारों रुपये वाहन भाड़े पर खर्च करने पड़ रहे हैं।

किसानों का कहना है कि ऑनलाइन खाद बिक्री के लाइसेंस अलग-अलग व्यापारियों को दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं रहता। ऐसे में किसानों को अपनी जरूरत का खाद लेने के लिए दूर-दराज के व्यापारियों के पास जाना पड़ता है। कई बार चार बोरी खाद खरीदने में ही करीब चार हजार रुपये तक परिवहन खर्च हो जाता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिवास खोरे ने आरोप लगाया कि खाद-बीज उपलब्ध कराने के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों को ऑनलाइन बिक्री का लाइसेंस दिया गया है, उनके यहां किसानों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। इसके कारण किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

किसान नेताओं का कहना है कि ऑनलाइन स्टॉक अपडेट करने की प्रक्रिया में भी गड़बड़ी होती है। कई व्यापारी वास्तविक उपलब्धता से अधिक स्टॉक ऑनलाइन दर्शा देते हैं, जिसके चलते किसान केंद्र तक पहुंचने के बाद भी खाद नहीं मिल पाता। बाद में वास्तविक स्टॉक दर्ज करने की प्रक्रिया में वितरण प्रभावित हो जाता है। ऐसी स्थिति में किसानों को मजबूरी में दूसरे स्थानों से खाद खरीदना पड़ता है।

किसान नेता रामजीवन वाष्ट ने कहा कि हर वर्ष खाद संकट की स्थिति बनती है, लेकिन किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते। किसानों को खाद और बीज के लिए लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।

वहीं अमानक खाद-बीज बिक्री का मुद्दा भी किसानों के बीच आक्रोश का कारण बना हुआ है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद केवल नोटिस देकर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी कंपनियों और व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

इस मामले में कृषि विभाग के उप संचालक जवाहरलाल कास्दे ने कहा कि किसानों की शिकायतें संज्ञान में आई हैं और मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद सोमानी

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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