श्री गुरु गोविन्द सिंह की जयंती पर विचार गोष्ठी में समरस समाज और चरित्र निर्माण का लिया गया संकल्प
जबलपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। किसी भी राष्ट्र का निर्माण केवल व्यक्तियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके चरित्र से होता है, इसी भाव को केंद्र में रखते हुए समरसता सेवा संगठन द्वारा श्री गुरु गोविन्द सिंह की जयंती के अवसर पर एक प्रेरणादायी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन अग्रवाल धर्मशाला, साकेत धाम के पास, ग्वारीघाट में संपन्न हुआ, जिसमें त्याग, बलिदान, धर्म रक्षा और समरस समाज की स्थापना जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह डॉ. प्रहलाद पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में ओजस्वी वक्ता, कथाकार एवं कवि पं. अभिनेष अटल ने अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथियों में नगर पंडित सभा अध्यक्ष पं. रमेश दुबे, महामंत्री पं. संतोष शास्त्री, समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन एवं सचिव उज्जवल पचौरी मंचासीन रहे।
मुख्य वक्ता पं. अभिनेष अटल ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी देश का निर्माण व्यक्तियों से नहीं, बल्कि व्यक्तियों के चरित्र निर्माण से होता है। उन्होंने कहा कि प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव से लेकर दशम गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह तक सभी गुरुओं ने त्याग, तपस्या और बलिदान के माध्यम से धर्म और मानवता की रक्षा की। गुरु गोविन्द सिंह को केवल भाषणों और संगोष्ठियों तक सीमित न रखते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए बैसाखी के पावन पर्व पर गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना कर पाँच व्यक्तियों को अमृतपान कराकर ‘पंच प्यारे’ बनाया। इन पंच प्यारों में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल थे, जिससे जाति-पाति के भेद को समाप्त करने का संदेश दिया गया। इसी माध्यम से गुरु गोविन्द सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा का संकल्प लेकर समरस समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
पं. अभिनेष अटल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश और समाज को जातियों, वर्गों और संप्रदायों में बाँट दिया गया है। हमारे महापुरुष, आराध्य, देवी-देवता और क्रांतिकारी भी समाजों में विभाजित कर दिए गए हैं। जब तक महापुरुषों को जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के दायरे में बाँधकर रखा जाएगा, तब तक समरस समाज का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक फूट से सावधान रहने तथा गुरुओं और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रहलाद पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु गोविन्द सिंह जी की जयंती पर उन्हें स्मरण करते हुए उनके पिता नवम गुरु गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को भी याद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म परिवर्तन के विरोध में सनातन धर्म की रक्षा हेतु अपने प्राणों का बलिदान दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुरु गोविन्द सिंह जी ने मुगल आक्रांताओं से संघर्ष किया और धर्म की रक्षा के लिए अपने पुत्रों तक का बलिदान दे दिया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत उद्बोधन में समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने कहा कि संगठन का उद्देश्य ऐसे महापुरुषों के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है, जिन्होंने अपनी वाणी, विचार और कृतित्व से भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा को सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह जैसे महापुरुष किसी एक समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सम्पूर्ण समाज के प्रेरणास्रोत हैं। विचार गोष्ठी के उपरांत गत दिवस सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने नर्मदा उद्यान में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन समरस, सशक्त और संस्कारित समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

