अतिथि शिक्षकों का पांचवें दिन भी धरना जारी, पॉप सॉन्ग गाकर सरकार को दिलाई वादों की याद

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अतिथि शिक्षकों का पांचवें दिन भी धरना जारी, पॉप सॉन्ग गाकर सरकार को दिलाई वादों की याद


अतिथि शिक्षकों का पांचवें दिन भी धरना जारी, पॉप सॉन्ग गाकर सरकार को दिलाई वादों की याद


- आयुक्त प्रबल सिपाहा भी पहुंचे धरना स्थल, शिक्षकों से की चर्चा

भोपाल, 20 सितम्बर (हि.स.)। नियमितीकरण और फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में अतिथि शिक्षक पांचवें दिन भी धरने पर बैठे रहे। रविवार को शिक्षकों ने गिटार की धुन पर पॉप सॉन्ग गाकर अपनी नौकरी की अनिश्चितता और सरकार से किए गए वादों की याद दिलाई। दोपहर बाद उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा भी धरना स्थल पर पहुंचे और शिक्षकों से चर्चा की।

नीलम पार्क में रविवार को धरने पर बैठे अतिथि शिक्षकों का आंदोलन उस समय अलग अंदाज में नजर आया, जब उन्होंने गिटार की धुन पर अपना बनाया पॉप सॉन्ग गाया। गीत के बोल थे- “हम अतिथि विद्वान हैं... बस कुछ दिन के मेहमान हैं। लाखों डॉक्टर, इंजीनियर हमने बनाए... आज हम ही फटे हाल में हैं।”

शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से सरकारी कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब भी उनकी नौकरी स्थायी नहीं है। नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की मांग के साथ वे फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने पर भी जोर दे रहे हैं। रविवार दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा नीलम पार्क पहुंचे। उन्होंने धरना दे रहे अतिथि शिक्षकों से मुलाकात की। हालांकि शिक्षक फॉलन आउट प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

मंत्री के बंगले से हटाए जाने के बाद नीलम पार्क में धरना

अतिथि शिक्षकों ने इससे पहले मंगलवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। प्रदर्शन में सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए थे। उनकी मांग थी कि नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की समय-सीमा तय की जाए और तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया बंद रखी जाए।

मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि शिक्षकों के चार प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया था। प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही। शिक्षकों के मुताबिक, मंत्री ने फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने बंगले के बाहर बैठे अतिथि शिक्षकों को हटाकर नीलम पार्क भेज दिया।

शिवराज सिंह चौहान को याद दिलाया था आश्वासन

बुधवार सुबह करीब 200 अतिथि शिक्षकों ने वहां से गुजर रहे केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया था। महिलाओं और शिक्षकों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को हुई महापंचायत में दिए गए आश्वासन की याद दिलाई थी। उस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने फॉलन आउट प्रक्रिया नहीं होने देने की बात कही थी।

शिक्षकों ने उनसे कहा था, “सर, सरकार तो आपकी ही है। कल 12 बजे से महिलाएं यहां बैठी हैं, रातभर खुले में पड़े रहे। मंत्री जी अंदर ही हैं, लेकिन पानी तक नहीं दिया जा रहा।” इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, “एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए। मैं आपकी बात सीएम तक पहुंचाऊंगा, प्रयत्न करता हूं।” बातचीत के दौरान कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाने लगे तो शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो बनाने से मना कर दिया था।

दो मांगों पर आंदोलन जारी

अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की समय-सीमा तय करना शामिल है। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि स्थायी नीति कब तक लागू की जाएगी। दूसरी मांग फॉलन आउट प्रक्रिया पर रोक लगाने की है। शिक्षक चाहते हैं कि स्थायी नीति लागू होने तक इस प्रक्रिया को बंद रखा जाए। उनके मुताबिक, नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण होने पर संबंधित कॉलेज में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी जाती है।

सरकार के आश्वासन का हवाला

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन में आयोजित सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर उज्जैन पहुंची अतिथि शिक्षकों की बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी भी बांधी थी। उस दौरान भी फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की बात कही गई थी। शिक्षकों का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है।

क्या है फॉलन आउट प्रक्रिया

सरकारी कॉलेजों में जब नियमित प्राध्यापकों की नियुक्ति या स्थानांतरण होता है, तो वहां पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी जाती है। इसी व्यवस्था को फॉलन आउट कहा जाता है। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें हर साल नौकरी जाने का डर बना रहता है। इसी व्यवस्था के विरोध में वे पांच दिन से नीलम पार्क में धरना दे रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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