चीनी के भंडारण पर सरकार की सख्ती, 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए लागू होगी सीमा
भोपाल, 29 अगस्त (हि.स.)। देश में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और जमाखोरी की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने स्टॉक पर निगरानी बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश में भी एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के भंडारण की सीमा लागू होने जा रही है। केंद्र सरकार के ‘शर्करा (थोक उपभोक्ताओं की स्टॉक होल्डिंग लिमिट) आदेश, 2026’ के तहत यह व्यवस्था 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी।
नए प्रावधानों के अनुसार, प्रतिमाह कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता अपने पास अधिकतम 15 दिन की आवश्यकता के बराबर चीनी का ही भंडारण कर सकेंगे। इसके दायरे में हलवाई, मिठाई विक्रेता, कन्फेक्शनरी निर्माता, शीतल पेय बनाने वाली इकाइयां, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा अन्य संस्थागत खरीदार आएंगे। सरकारी संस्थानों को इस सीमा से बाहर रखा गया है।
अगस्त में 39,692 मीट्रिक टन चीनी बिक्री की सीमा
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में अगस्त माह के दौरान घरेलू खपत के लिए सफेद अथवा परिष्कृत चीनी की बिक्री की सीमा 39,692 मीट्रिक टन निर्धारित की है। इसमें राज्य के 22 चीनी कारखाने शामिल हैं। चीनी की बिक्री और खरीद की निगरानी जीएसटी के आंकड़ों के माध्यम से की जाएगी। इसके साथ ही राज्य के अधिकारियों को कारोबारियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्धारित सीमा अथवा भंडारण संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने और जमाखोरी के जरिए कीमतों में होने वाली अनावश्यक वृद्धि पर नियंत्रण रखना है।
पीडीएस में चीनी वितरण पहले ही बंद
चीनी के स्टॉक पर नियंत्रण की यह व्यवस्था ऐसे समय लागू की जा रही है, जब बाजार में कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बनी हुई है। वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली चीनी का वितरण अप्रैल से बंद है। केंद्र सरकार के अनुसार 15वें वित्त आयोग की अवधि के साथ संबंधित योजना समाप्त हो गई है।
इस बीच मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के चीनी की कीमतों और इसके सेवन को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो चुका है। उन्होंने कहा था कि चीनी बहुत महंगी होनी चाहिए और 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को इसका सेवन छोड़ देना चाहिए। कांग्रेस ने बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे उपभोक्ताओं के प्रति असंवेदनशील बताया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

