राजगढ़ः गौशालाओं में फर्जी सत्यापन पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, पांच पशु चिकित्सकों की वेतनवृद्धि रोकने की अनुशंसा

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राजगढ़ः गौशालाओं में फर्जी सत्यापन पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, पांच पशु चिकित्सकों की वेतनवृद्धि रोकने की अनुशंसा


राजगढ़, 26 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में गौवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। गौशालाओं में संरक्षित गौवंश के सत्यापन में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा ने रविवार को पांच पशु चिकित्सा अधिकारियों की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की अनुशंसा आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी विभाग को भेजी है।

कलेक्टर के निर्देश पर जिले की गौशालाओं में संरक्षित गौवंश का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में पाया गया कि कई गौशालाओं में पशु चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित गौवंश की संख्या और मौके पर मौजूद वास्तविक संख्या में अंतर है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों से कारण बताओ नोटिस के माध्यम से जवाब मांगा गया, लेकिन उनके स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए।

कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों में जीरापुर के डॉ. तीरथराज कुलस्ते, सारंगपुर के डॉ. अमित शाक्य, सुठालिया की डॉ. अनीता पंवार, माचलपुर (मलावर क्षेत्र) के डॉ. विनोद यादव तथा खिलचीपुर के डॉ. मधुसूदन शाक्य शामिल हैं। इन सभी द्वारा सत्यापित गौशालाओं में गौवंश की संख्या में अंतर मिलने पर उनके विरुद्ध वेतनवृद्धि रोकने की अनुशंसा की गई है।

इधर,कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर डॉ. मिश्रा की अध्यक्षता में निराश्रित गौवंश की शिफ्टिंग और जिओ-टैगिंग को लेकर समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी सहित सभी एसडीएम, जनपद पंचायतों के सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की सभी शासकीय गौशालाएं अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित हों और कोई भी निराश्रित गौवंश राष्ट्रीय या राज्य मार्गों पर दिखाई नहीं देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन ग्राम पंचायतों द्वारा शत-प्रतिशत निराश्रित गौवंश को गौशालाओं में रखने की व्यवस्था नहीं की जाएगी, उनके अनुदान में कटौती का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। साथ ही सभी गौवंश की समय-सीमा में जिओ-टैगिंग पूरी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने रात्रिकालीन गश्त के दौरान सड़क या हाईवे पर निराश्रित गौवंश मिलने पर तत्काल फोटो लेकर संबंधित अधिकारियों को भेजने और ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि गौवंश संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है। भविष्य में सत्यापन में किसी भी तरह की लापरवाही या गलत जानकारी मिलने पर और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

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