प्रख्यात साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत पंचतत्व में विलीन, भोपाल के भदभदा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

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प्रख्यात साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत पंचतत्व में विलीन, भोपाल के भदभदा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार


भोपाल, 01 अगस्त (हि.स.) । हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ साहित्यकार और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत का शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनका शुक्रवार को भोपाल स्थित निवास पर हृदय गति रुकने से निधन हो गया था।

कैलाश चंद्र पंत 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार को उन्होंने भोपाल में अपने निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भोपाल से लेकर उनके पैतृक उत्तराखंड के बागेश्वर के गांव खंतोली में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे तीन विवाहित पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया गया।

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कैलाश चंद्र पंत लंबे समय तक मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से जुड़े रहे। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

उत्तराखंड से था पैतृक संबंध

कैलाश चंद्र पंत का पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली था। उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के महू (इंदौर) में हुआ था। उनके पिता लीलाधर पंत और माता हरिप्रिया पंत रोजगार के सिलसिले में मध्य प्रदेश में आकर बस गए थे। उन्होंने अपने शैक्षणिक और साहित्यिक जीवन में इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता तथा भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में प्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा वे 'शिक्षा प्रदीप', 'जनधर्म' और 'दूरगामी आह्वान' जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे।

इसी वर्ष मिला था पद्मश्री सम्मान

हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वे हिंदी भवन, भोपाल के संचालक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

उनकी चर्चित कृतियों में 'कौन किसका आदमी', 'धुंध के आर-पार', 'शब्द का विचार-पथ' और 'शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा' शामिल हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान और संस्कृति गौरव सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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