फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना पर एफआईआर दर्ज

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फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना पर एफआईआर दर्ज


फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना पर एफआईआर दर्ज


भोपाल/गुना, 19 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के गुना जिले के रहने वाले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में उनके खिलाफ पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने गत दिवस एफआईआर दर्ज की है।

आरोप है कि उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के अभ्यर्थी के तौर पर प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ लिया। मामले की जांच उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा की गई थी, जिसकी रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अब पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

पूर्व आईपीएस के जाति प्रमाणपत्र पर सवाल मिली जानकारी के अनुसार, रघुवीर सिंह मीना के जाति प्रमाणपत्र को लेकर राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामला मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति” भोपाल के समक्ष पहुंचा।

समिति ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों की जांच की।जाति प्रमाणपत्र निकला अमान्य जांच में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से जारी किए गए अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि यह प्रमाणपत्र क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा जारी किया गया था। समिति की जांच में प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी सवाल सामने आए। पहले ओबीसी, बाद में एसटी से जाति प्रमाण पत्र जारी होने का आरोप।

इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि पुलिस की प्रारंभिक विवेचना में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, रघुवीर सिंह मीना ने पुलिस सेवा में आने से पहले मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया था। इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने के दौरान उनके द्वारा एसटी वर्ग का लाभ लेने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, इसी आधार पर उनकी नियुक्ति, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है। प्रमाणपत्र जारी करते वक्त नियमों का पालन हुआ या नहीं ? वही उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में वर्ष 1984 में विदिशा से जारी ST प्रमाणपत्र से संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले गए।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में तत्कालीन नियमों का पालन किया गया था या नहीं और इसमें संबंधित अधिकारियों अथवा अन्य व्यक्तियों की कोई भूमिका थी या नहीं। एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस मुख्यालय भोपाल के थाना सतर्कता में शुक्रवार को रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 167 और 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पूर्व आईपीएस की पत्नी रह चुकीं हैं चांचौड़ा विधायक

रघुवीर सिंह मीना का संबंध गुना जिले के एक चर्चित राजनीतिक परिवार से भी है। उनकी पत्नी ममता मीना चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। वह वर्ष 2013 से 2018 तक चांचौड़ा विधानसभा से विधायक रहीं। इसके अलावा ममता मीना जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वर्तमान में पति-पत्नी दोनों के जिला पंचायत सदस्य भी है।

पुलिस जांच जारी

फिलहाल पुलिस की जांच दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर आगे बढ़ रही है। खास तौर पर वर्ष 1984 में जारी एसटी प्रमाणपत्र, उसके आधार पर प्राप्त आरक्षण लाभ और पुलिस सेवा में नियुक्ति से पहले ओबीसी के रूप में प्रस्तुत किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्य यह तय करेंगे कि इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका थी और आरोपों के संबंध में आगे क्या कानूनी कार्यवाही होती है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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