अनूपपुर: इंगांराजविवि में आपसी कहासुनी और सामान्य लड़ाई को बताया नस्लीय हमला, पुलिस ने नकारा
अनूपपुर, 17 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच मारपीट हुई। इस मारपीट में असम का एक छात्र घायल हो गया। घटना के बाद इसे एक पक्ष द्वारा नस्लीय हमला” बताते हुए प्रचारित किया गया था। लेकिन अब तक की पुलिस की जांच में हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है।
अनूपपुर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच हुई हिंसा की हालिया घटना ने एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक असमिया छात्र पर हमले की खबरें बड़े पैमाने पर चर्चा में थीं, वहीं पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे मामले की पूरी कहानी ही बदल दी है।
मारपीट में बदल गई आपसी बहस
यह घटना 13 जनवरी को सुबह करीब 4 बजे हुई। बताया जा रहा है कि आरोपी छात्र अनुराग पांडे, जतिन सिंह, विशाल यादव और दो अन्य, उस हॉस्टल के कमरे में गए जहां वह पहले रहते थे। इस कमरे में अभी असम का छात्र हिरोश ज्योति दास रहता है। आरोपी छात्रों और ज्योति दास के बीच बहस हुई, जो बाद में मारपीट में बदल गई।
चौंकाने वाला खुलासा
अनूपपुर पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने शनिवार को हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि यह घटना आपसी कहासुनी और सामान्य लड़ाई का नतीजा थी, न कि कोई पहले से सोची-समझी साजिश। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना को “नस्लीय हमला” बताया गया था, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
उन्होंने बताया कि पीड़ित छात्र ने अपनी शिकायत में किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी या गाली-गलौज का जिक्र नहीं किया है। विश्वविद्यालय में नॉर्थ-ईस्ट के लगभग 25 छात्र पढ़ते हैं और वहां कभी भी नस्लवाद की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने दोहराया कि यह एक सामान्य लड़ाई का मामला था।
नाक की हड्डी टूटने की बात भी खारिज
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था कि छात्र की नाक टूट गई थी और उसे गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन पुलिस जांच में यह बात झूठी पाई गई। पुलिस इसे दोनों पक्षों के बीच एक सामान्य कहासुनी मान रही है। एसपी मोती उर रहमान ने यह भी बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी हड्डी टूटने का जिक्र नहीं है।
5 छात्रों को आरोपी बना निकाले गए विश्वविद्यालय से
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पांचों छात्रों को निष्कासित कर दिया है। जांच अभी भी जारी है। विश्वविद्यालय के कई छात्रों का भी मानना है कि यह हॉस्टल लाइफ के दौरान हुआ एक मामूली विवाद था, जिसे बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और अब सच्चाई का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है।
पीड़ित छात्रों ने 'वास्को' नामक छात्र पर सुनियोजित साजिश का आरोप
ज्ञात हो कि इसके पूर्व पीड़ित छात्रों ने बताया था कि विश्वविद्यालय में एक बड़े और संगठित षड्यंत्र हैं जो 'वास्को' नामक छात्र तथा उसके साथ मिले शिक्षकों ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश के तहत निर्दोष छात्रों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाया है। पीड़ित छात्रों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा हैं कि हम निर्दोष छात्र हैं। वास्को और उसके सहयोगी शिक्षकों ने मिलकर हमारा जीवन बर्बाद करने की साजिश रची है।
शिक्षकों की हो जांच
पीड़ित छात्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों से एक संगठित गिरोह सक्रिय है जिसका मुख्य 'वास्को' नामक छात्र है। जिसमे चार से अधिक शिक्षक भी शामिल हैं जो प्रशासनिक पदों पर रहते हुए अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि यह गिरोह कई तरीकों से विश्वविद्यालय को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है। जिसमें सामान्य घटनाओं को क्षेत्रवाद-जातिवाद से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा करना, मीडिया में फर्जी समाचार प्रसारित करवाना, सोशल मीडिया चैनलों पर बनावटी ऑडियो-वीडियो अपलोड करवाकर अपवाह फैलाना,बाहरी युवाओं को इकट्ठा कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना, एट्रोसिटी एक्ट और लड़कियों के मुद्दों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें दर्ज करवाना, कुलपति एवं प्रशासन पर गलत निर्णय लेने का दबाव बनाना प्रमुख है।
कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट की जांच की मांग
पीड़ित छात्रों ने मांग की हैं कि वास्को के पिछले 3 वर्षों के कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट की जांच हो। निर्दोष छात्रों के विरुद्ध दर्ज झूठ प्रकरण को निरस्त किया जाए। वास्को को विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जाए और उसके परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगे। विश्वविद्यालय परिसर में शांति व सद्भावना बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

