बुधनी-बरखेड़ा रेल सेक्शन में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए होगी दोनों ओर फेंसिंग
भोपाल, 30 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में वन्यजीवों की सुरक्षा और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत बुधनी-बरखेड़ा रेल सेक्शन में विशेष फेंसिंग लगाई जा रही है। इसका उद्देश्य जंगलों से गुजरने वाली रेल पटरियों पर वन्यजीवों और ट्रेनों के बीच टकराव रोकना, वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना और रेल परिचालन को सुचारू बनाना है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पहल 288 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना का हिस्सा है। इसके तहत बीना-खंडवा रेल मार्ग पर सुरक्षात्मक फेंसिंग लगाने की योजना है। परियोजना पूरी होने पर करीब 530 किलोमीटर रेलखंड को इसके दायरे में लाया जाएगा। इसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
फेंसिंग रेलवे ट्रैक और उससे सटे जंगलों के बीच भौतिक अवरोध का काम करेगी। इससे जंगली जानवरों और मवेशियों के अचानक रेलवे ट्रैक पर पहुंचने की आशंका कम होगी। बुधनी-बरखेड़ा के बीच का रेलखंड रातापानी वन क्षेत्र के संवेदनशील हिस्से से गुजरता है। इस क्षेत्र में वन्यजीवों की रेल पटरियों पर आवाजाही लंबे समय से वन्यजीवों की सुरक्षा और रेल परिचालन के लिए चुनौती बनी हुई है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अचानक ट्रैक पर जानवरों के आ जाने से ट्रेनों की गति प्रभावित होती है। विशेषकर व्यस्त और लंबी दूरी के रेल मार्गों पर इससे समय-सारणी बिगड़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। फेंसिंग से वन्यजीवों की अनियंत्रित आवाजाही रोकने में मदद मिलेगी और ट्रेनों के परिचालन में होने वाली अनावश्यक देरी भी कम होगी।
इस परियोजना के साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं। बुधनी-बरखेड़ा सेक्शन में जानवरों के लिए अलग से ओवरपास बनाया जा रहा है, ताकि वन्यजीव सुरक्षित तरीके से रेलवे ट्रैक पार कर सकें।
दरअसल, बुधनी-मिडघाट-चौका-बरखेड़ा कॉरिडोर को वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां पहले भी अधूरी फेंसिंग और वन्यजीवों के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं होने को लेकर चिंता जताई जाती रही है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी आग्रह किया है कि फेंसिंग और ओवरपास का निर्माण समन्वित योजना के तहत किया जाए, ताकि जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित न हो। यह भी जरूरी है कि फेंसिंग के कारण वन्यजीव किसी असुरक्षित क्षेत्र की ओर न मुड़ें और उनके लिए सुरक्षित आवागमन के रास्ते उपलब्ध रहें।
गौरतलब है कि बीना-खंडवा रेलखंड पर फेंसिंग की योजना रेलवे के व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संवेदनशील रेल मार्गों को अधिक सुरक्षित बनाना है। रेलवे अपने नेटवर्क के हजारों किलोमीटर हिस्से में पहले ही बाड़ लगाने का काम कर चुका है। अधिकारियों के अनुसार, फेंसिंग के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और वन्यजीवों की आवाजाही के तौर-तरीकों का ध्यान रखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा के साथ यात्रियों और माल परिवहन के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद रेल कॉरिडोर तैयार करना भी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

